operation sindhu: 224 भारतीयों का ‘ऑपरेशन सिंधु’ रेस्क्यू, कैसे घर लौटे?
operation sindhu: 25 जून की सुबह, दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़े व्यस्त दृश्य का निर्माण हुआ। “ऑपरेशन सिंधु” के तहत इज़राइल से लौटे 224 भारतीयों का तिरंगे के साथ जोरदार स्वागत किया गया। इससे पहले, उसी दिन रात को ईरान के मशहद से 282 नागरिकों को लाने वाली फ्लाइट पहुंच चुकी थी। कुल मिलाकर अब तक 3,394 भारतीयों को इज़राइल और ईरान से सुरक्षित भारत लाया गया है।
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✈️ ऑपरेशन सिंधु: क्या था और क्यों शुरू हुआ?
- शुरुआत और मकसद: 13 जून से शुरू हुए इज़राइल-ईरान द्वंद्व के बीच भारत ने फौरन “ऑपरेशन सिंधु” नामक ह्यूमॅनिटेरियन मिशन लॉन्च किया। इसका उद्देश्य दोनों केंद्रों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना था ।
- पहली उड़ान: 18 जून को येरवेन (आर्मेनिया) होते हुए पहले ग्राफ में करीब 110 भारतीय स्टूडेंट्स को दिल्ली लाया गया ।
- जारी प्रयास: अगले दिनों में 827, फिर 285, और अंततः 1,100 नागरिकों का रेस्क्यू हो चुका है।
🛑 अभियान बंद: क्यों और कैसे?
- सीज़फ़ायर का ऐलान: 24 जून को युद्ध विराम की घोषणा के बाद भारत ने आंकलन कर दूतावास से नव-नामांकन डेस्क बंद कर दिया ।
- सुरक्षा पूर्व अनुग्रह: हालांकि वापस लौटे लोगों के अनुभव और स्थानीय हालात बेहतर दिख रहे हैं, लेकिन दूतावास ने निगाह बनाए रखी है और स्थिति बिगड़ने पर ऑपरेशन फिर से शुरू करने की बात कही ।
🔍 ईरान में जारी एहतियात
- मशहद सलाह कांटा: मशहद में फंसे लोगों को सद्र होटल में रुकने को कहा गया, और सुरक्षित रूप से निकलने के लिए उन्हें जगह दी गई ।
- सुरक्षा ऐप और हेल्पलाइन: किसी असुविधा की सूचना देने के लिए 24×7 हेल्पलाइन और टेलीग्राम चैनल बनाए गए, जो आगे कुछ दिन संचालित रहेंगे ।
लौट आए नागरिकों की बात
यूपी के सैयद आदिल मंसूर ने बताया कि “हालात अब सामान्य हैं, दूतावास और स्टाफ ने बेहतर व्यवस्था की”—अपनी जमीन पर बहुचर्चित राहत मिली भावनात्मक पल ।
एक अन्य नागरिक ने स्वीकारा कि कुछ दिन पहले स्थिति अकल्पनीय थी, लेकिन अब सुरक्षित और व्यवस्थित लग रही है।
क्षेत्रीय पृष्ठभूमि
- ईरान‑इज़राइल युद्ध: 13 जून को शुरू हुआ ड्रोन और मिसाइलों का हमला, और 24 जून को युद्ध विराम पर सहमति हुई।
- विदेशी नागरिकों की वापसी: कई देशों (जैसे चीन, जर्मनी, यूएस) ने भी नागरिकों को सुरक्षित निकालने में योगदान दिया।
- ईरान से पलायन: तेहरान से बड़ी संख्या में लोग भाग निकले, जिससे आशा की किरण संभव हो सकी ।
🧭 ऑपरेशन सिंधु का सार
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| लॉन्च तिथि | 18 जून 2025 |
| निकालें गए | ~3,394 भारतीय |
| समापन | 24 जून को सीज़फ़ायर के बाद डेस्क बंद |
| भविष्य | हालात बिगड़े तो मिशन फिर से शुरू |
🌐 वैश्विक संदर्भ
- ऑपरेशन सिंधु से पहले भारत ने कई बड़े रेस्क्यू सफलतापूर्वक अंजाम दिए हैं:
- ऑपरेशन गंगा (2022) – यूक्रेन से 20,000+
- ऑपरेशन कावेरी (2023) – सूडान से 3,800+
- ऑपरेशन अजायि, देवी शक्ति, मित्र शक्ति, संजीवनी – अफगानिस्तान, तुर्की, मालदीव से नागरिक निकाले गए
- “ऑपरेशन सिंधु” इन्हीं मिशनों की कड़ी में तीसरा प्रमुख कार्य है और भारत की ह्यूमॅनिटेरियन क्षमताओं का परिचायक है।
🔧 भविष्य की रणनीति
भारत वापस लौटे नागरिकों की निगरानी करता रहेगा और अगर किसी को सहायता की जरूरत पड़ी, तो पुनः मिशन शुरू करने की तैयारी में रहेगा। भारतीय दूतावास ने कहा है: “जहां हैं, वहीं रहें, हालात पर नजर रखें।”
“ऑपरेशन सिंधु” न सिर्फ 224 भारतीयों की जिंदगी सुरक्षित लाया, बल्कि भारत के वैश्विक सशक्त और ह्यूमॅन्टेरियन छवि को भी पुष्ट किया। जहाँ दुनिया तनाव में थी, वहाँ भारत ने सुरक्षित मार्ग और दृढ़ निर्णय का परिचय दिया
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