Mahishasura Mardini Temple Mp: मध्यप्रदेश के खरगोन जिले की सीमा के आखिरी छोर पर विध्यांचल पर्वत के शिखर पर एक मंदिर बना हुआ है, जहां मां विंध्यवासिनी देवी विराजमान है। कहा जाता है कि यह मंदिर बहुत प्रचीन है, इसका जीर्णोंद्धार होलकर शासन काल में देवी अहिल्या बाई होलकर ने करवाया था। इस मंदिर को विश्व में महिषासुर मर्दिनी मां पार्वती का एकमात्र प्राचीन मंदिर माना जाता है, जहां माता अष्टभुजा रूप में विराजमान हैं।
इस मंदिर की खास बात यह माता यहां तीन बार अपना स्वरुप बदलती हैं।
तीन बार बलदलता है मां का स्वरुप
स्थानीय निवासी बताते हैं। माता रानी पूरे दिन में 3 बार अपना रुप बदलती है। सुबह मां बाल रुप में होती है। दोपहर में मां युव रुप में नजर आती है। वहीं शाम होते- होते बुजुर्ग रुप धारण कर लेती है।
कहा जाता है कि, यहां माता के दर्शन करने स्वंय शेर आता है। कहा जाता है रात के अंधेरे में शेर माता के दर्शन करने आता है।
नि:संतान महिला की भरती है गोद
कहा जाता है मां विध्यावसिनी से जो भी सच्चे मन से मांगो पूरी होती है। विशेष कर जिन महिलाओं की औलाद नहीं है। मां उनकी गोद भर देती है।
भक्त दूर – दूर से संतान की कामना लेकर माता के दर्शन करने आते हैं। नवरात्रि के समय भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
इस जगह पर की थी महिषासुर का वध
कहा जाता है यह वहीं स्थान है जहा माता ने महिषासुर का वध किया था। हजारों साल पहले महिषासुर नामक दानव ने आतंक मचा रखा था। उसे वरदान प्राप्त था कि उसका वध कन्या के हाथों होगा।
सभी देवताओं ने मां दुर्गा से प्रार्थना की तब मां ने कन्या का रुप लिया और इसी स्थान पर महिषासुर का वध किया है। औऱ फिर वो इसी स्थान पर विराजमान हो गई। इस घटना का जिक्र पुराणों में भी किया गया है।
