लखनऊ की राजधानी में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। मात्र 13 वर्षीय बालक यश ने ऑनलाइन गेम ‘फ्री फायर’ की घातक लत के चंगुल में फंसकर न केवल अपने पिता के बैंक खाते से 14 लाख रुपये गंवा दिए, बल्कि अपराधबोध और डर के मारे आत्महत्या कर ली।

online gaming addiction: बेटे की अनजानी लत ने सब कुछ छीन लिया
यश के पिता सुरेश, जो एक साधारण किसान हैं, ने अपनी मेहनत की कमाई से खेत बेचकर यह राशि जमा की थी। उनका सपना था कि इस पैसे से परिवार के लिए एक पक्का घर बनवाएं, लेकिन बेटे की अनजानी लत ने सब कुछ छीन लिया।
साथ सादगी भरा जीवन जीता था
यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि डिजिटल युग में बच्चों पर ऑनलाइन गेमिंग के खतरे की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करती है।यश एक सामान्य बच्चा था, जो गांव के स्कूल में पढ़ता था और घर में माता-पिता के साथ सादगी भरा जीवन जीता था।
online gaming addiction: धीरे-धीरे यह लत में बदल गया
लेकिन महामारी के दौर में जब घरों में समय कटने लगा, तो मोबाइल फोन बच्चों के लिए एक नया संसार बन गया। सुरेश के घर में केवल एक ही पुराना मोबाइल फोन था, जो परिवार की साझा संपत्ति था। इसी फोन पर यश ने ‘फ्री फायर’ गेम डाउनलोड कर लिया। शुरू में यह खेल मात्र मनोरंजन का साधन लगा, लेकिन धीरे-धीरे यह लत में बदल गया।
मेरा बेटा हमेशा खुशमिजाज रहता था
परिवार को यश की इस गुप्त जंग का जरा भी अंदाजा नहीं था। मासूम बच्चा इतने गहरे मानसिक तनाव से जूझ रहा था कि उसने कभी माता-पिता से अपनी व्यथा साझा नहीं की। सुरेश बताते हैं, “मेरा बेटा हमेशा खुशमिजाज रहता था।
online gaming addiction: बार-बार गेम में पैसे ट्रांसफर करता रहा
कभी ऐसा नहीं लगा कि वह किसी परेशानी में है।” लेकिन हकीकत कुछ और ही थी। यश ने पिता के फोन में लिंक किया गया बैंक खाता इस्तेमाल कर लिया। UPI या नेट बैंकिंग के जरिए वह बार-बार गेम में पैसे ट्रांसफर करता रहा।
मात्र 20 हजार रुपये निकालने गया
कुल 14 लाख रुपये, जो सुरेश की जिंदगी भर की कमाई थे, धीरे-धीरे गायब होते चले गए। यह रकम इतनी बड़ी थी कि परिवार का घर बनाने का सपना चूर-चूर हो गया।सुरेश को इसकी भनक तब लगी जब वह बैंक से मात्र 20 हजार रुपये निकालने गया।
online gaming addiction: गेम के इन-ऐप परचेज में खर्च हो चुकी थी
काउंटर पर खाते की बैलेंस चेक करने पर हैरानी की सारी हदें पार हो गईं। खाता लगभग शून्य था! घबराए हुए सुरेश ने तुरंत बैंक मैनेजर से बात की। मैनेजर ने स्टेटमेंट दिखाते हुए सच्चाई बयान की – पूरी राशि ‘फ्री फायर’ गेम के इन-ऐप परचेज में खर्च हो चुकी थी।
अपराधबोध से घिरे यश ने घर में ही फांसी लगा ली
online gaming addiction: यह सुनकर सुरेश के पैरों तले जमीन खिसक गई। वे घर लौटे और यश से पूछताछ करने ही वाले थे कि विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा। सोमवार रात करीब 9 बजे, यश ने चुपचाप फोन को रीसेट कर दिया। सभी ऐप्स, फेसबुक, गैलरी, मैसेज, कॉल हिस्ट्री और सोशल मीडिया अकाउंट्स अपने आप डिलीट हो गए। इसके ठीक बाद, अपराधबोध से घिरे यश ने घर में ही फांसी लगा ली।
