ऑनलाइन डेटिंग के खतरे: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग डिजिटल दुनिया पर निर्भर है। आजकल ज्यादातर काम इंटरनेट से होता है। हर कोई इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। काम के साथ – साथ लोग दोस्ती और प्यार तक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए ढूंढ लेते है, जैसे – टिंडर, बम्बल, ओकेक्यूपिड, हिंज, इंस्टाग्राम जैसे ऐप्स ने डेटिंग को पहले से कहीं आसान बना दिया है। लेकिन जहां एक ओर यह प्लेटफॉर्म्स लोगों को जोड़ने का माध्यम बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इनके जरिए ठगी, शोषण और धोखे के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है।
ऑनलाइन डेटिंग के खतरे: आइए जाने इसके खतरे
पिछले कुछ सालो से ऑनलाइन डेटिंग का चलन काफी बढ़ गया है। एक सर्वे के मुताबिक भारत में करीब 35% युवा किसी न किसी ऑनलाइन डेटिंग ऐप का इस्तेमाल कर चुके हैं। खासकर मेट्रो शहरों में यह आंकड़ा 50% से भी ज्यादा है। कोरोना महामारी के दौरान जब सामाजिक मेलजोल पर रोक लगी, तब इन ऐप्स की लोकप्रियता और भी बढ़ गई।
डेटिंग ऐप्स की एक खासियत यह है कि ये लोगों को जेंडर, उम्र, लोकेशन, इंटरेस्ट और अन्य मानकों के आधार पर जोड़ते हैं। लोग अपनी प्रोफाइल बनाते हैं, फोटोज अपलोड करते हैं, फिर जिसकी प्रोफाइल अच्छी लगती है, उससे बात चीत करते है फिर मिलते है और शादी तक कर लेते है, लेकिन कई बार धोखा भी मिलता है। इसलिए सावधान हो जाइए।
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ऑनलाइन डेटिंग के खतरे: फेक प्रोफाइल्स और नकली पहचान
डेटिंग ऐप्स पर सबसे बड़ी समस्या फर्जी प्रोफाइल्स की होती है। कई बार लोग अपनी पहचान छुपाते है, अपने बारें में गलत जानकारी देते है, आकर्षक प्रोफाइल बनाकर खुद को बेहतर दिखाने की कोशिश करते हैं, और इस तरह ठगी का जाल बिछाते हैं, और कई लोग फस भी जाते हैं, इसलिए ऑनलाइन डेटिंग के फायदे कम नुकसान ज्यादा है।

बिना जाने मुलाकात शुरु,खतरा
ऑनलाइन डेटिंग में बात करने के बाद इतने अटैच हो जाना की कोई शक्स कहीं बुलाए बिना जांच पड़ताल किए। बिना जाने इमोशनल होकर मिलने चले जाना। और फिर प्यार के नाम पर फिजिकल होना और फिर छोड़ देना और शादी का दबाव बनाए तो हत्या तक कर देना। यह आजकल का ट्रेंड बना हुआ है। ऐसे में असुरक्षित जगहों पर मिलना या अकेले जाना कई बार खतरनाक के साथ जान का खतरा भी हो सकता है।
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साइबर अपराध और धोखाधड़ी
डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर साइबर अपराधी लोगों को प्यार के जाल में फंसाते हैं। और उनसे पैसे की मांग करते है। कई बार भावनात्मक रूप से प्रभावित कर वे बैंक डिटेल्स, ओटीपी या पर्सनल फोटोज ले लेते हैं और फिर ब्लैकमेलिंग शुरू कर देते हैं। NCRB (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो सालों में डेटिंग ऐप्स के जरिए साइबर फ्रॉड के मामलों में 30% तक की बढ़ोतरी हुई है।
डेटा प्राइवेसी और ऐप की जानकारी
डेटिंग ऐप्स यूजर्स से बहुत सी निजी जानकारियां मांगते हैं—जैसे लोकेशन, जन्मतिथि, इंटरेस्ट्स, फोटो, आदि। अगर ये ऐप्स पर्याप्त सुरक्षा नहीं देतीं, तो हैकर्स इन्हें चुरा सकते हैं या इनका दुरुपयोग कर सकते हैं। इसलिए किसी भी ऐप का उपयोग करने से पहले उसकी टर्म और कंडीशन अच्छे से पढ़े और पूरी जानकारी ले की वो सुरक्षित है, या नहीं।

मानसिक और भावनात्मक शोषण
कई बार लोग ऑनलाइन रिश्ता बनाकर इमोशन से खेलते हैं। किसी से महीनों बात करने के बाद अचानक गायब हो जाना (ghosting), झूठे वादे करना या इमोशनल ब्लैकमेल जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति मानसिक तनाव और अवसाद का शिकार हो जाते है।
