one Nation one Election JPC: एक देश-एक चुनाव (one Nation one Election) के लिए संशोधन बिल पर जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी यानि की JPC की तीसरी बैठक मंगलवार को हुई। ये बैठक अध्यक्ष पीपी चौधरी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में पूर्व चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित, लॉ कमीशन के पूर्व अध्यक्ष ऋतुराज अवस्थी समेत 4 लॉ एक्सपर्ट्स ने कमेटी के सामने सुझाव रखे।
अब तक कमेटी की 2 बैठकें हो चुकी हैं। इस बिल पर कानून मंत्रालय ने संसद की संयुक्त समिति को बताया है कि, लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से लोकतंत्र कमजोर नहीं होगा। समिति इस समय ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से जुड़े विधेयकों पर विचार कर रही है।
कानून मंत्रालय ने संसदीय समिति को बताया है – एक साथ चुनाव कराने से राजनीति में नए चेहरों के लिए रास्ते भी खुलेंगे one Nation one Election पर बनाई गई ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित ने भी कई बातें रखीं।
एक देश-एक चुनाव क्या है…
भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए अलग-अलग वक्त पर चुनाव होते हैं। एक देश-एक चुनाव का मतलब लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से है। यानी मतदाता लोकसभा और विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही वक्त पर वोट डालेंगे।
one Nation one Election JPC: आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही हुए थे, पर 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दिया गया था। उसके बाद दिसंबर, 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।
