Pashupatinath Mandir Mandsaur: मध्य प्रदेश के मंदसौर शहर में एक ऐसा मंदिर जहां भगवान पशुपतिनाथ की प्रतिमा विराजमान है। कहते हैं कि यह प्रतिमा विश्व की एकमात्र अष्टमुखी प्रतिमा है, जो मंदसौर में विराजमान है। इस प्रतिमा में 8 मुख है, उन सभी आठो मुखो का अलग स्वरुप है।
इस मंदिर की कैसे हुई स्थापना
स्थानीय निवासी बताते हैं कि, यह प्रतिमा पांचवी सदी में निर्मित हुई थी लेकिन आक्रांताओं के डर से इस प्रतिमा को शिवना नदी के अंदर छुपा दिया गया था।
फिर सालो बाद सन 1940 में भगवान ने एक शक्स के सपने में आएं, जिसके बाद उस प्रतिमा को नदी से बाहर निकाला गया था।

21 साल तक अष्टमुखी प्रतिमा को खेत में रखा गया
1940 में नदी से बाहर निकालने के बाद 21 साल तक इस प्रतिमा को खेत में रखा गया। इस प्रतिमा की पूर्व विधायक बाबू सुदर्शनलाल अग्रवाल ने देखभाल की। उनकी सच्चे मन से हर रोज पूजा पाठ करते थे। उसके 21 साल बाद मंदिर का निर्माण कराया गया।
1961 में हुई मंदिर की स्थापना
मंदिर का निर्माण हुआ उसके बाद 20 नवंबर 1961 में मंदिर में अष्टमुखी प्रतिमा की स्थापना की गई। यह प्रतिमा बेहद विशालकाय और अनोखी है। इस प्रतिमा को अलग – अलग आठ शिलाखंड उकेरी गई है। इस प्रतिमा में ऊपर चार मुख और नीचे 4 मुख है। इस मंदिर में भगवान की प्रतिमा को स्थापित हुए 65 साल की गई।

इस प्रतिमा का नाम अष्ट तत्वो पर आधारित
इस प्रतिमा का नामकर शिव के अष्ट तत्वो पर रखा गया। इसमें शर्व, भव, रुद्र, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव के रुप में पूजा की जाती है।
आठ मुखों वाली प्रतिमा में आठो मुख जीवन की चार अवस्थाओं को दर्शाते है। पूर्व का मुख बाल्यावस्था और दक्षिण का मुख्य किशोरावस्था, पश्चिम का मुख युवावस्ता और उत्तर का मुख प्रौढ़ावस्था को दर्शता है।
इन त्योहार पर लगती है भक्तों की भीड़
यह मंदिर शिव भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, यहां सोमवार के दिन विशेष रुप से भगवान के दर्शन करने आते है। महाशिवरात्रि और श्रावण मास के समय तो भक्तो की भीड़ उमड़ती है।
