मध्यप्रदेश में OBC वर्ग को 27% आरक्षण देने के मामले में लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस नेता और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार की आँखें खोलने वाली टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि पिछले छह वर्षों में सरकार ने कोर्ट में केस लड़ने के लिए वकीलों को लगभग 100 करोड़ रुपये की फीस दी है, जो एक भारी राशि है।
सर्वदलीय बैठक पर विवाद
सरकार ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा की है, लेकिन जीतू पटवारी ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब विवाद स्पष्ट है और सरकार स्वयं OBC आरक्षण के पक्ष में है, तो फिर सर्वदलीय बैठक की क्या आवश्यकता है। पटवारी का सुझाव है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके इस केस को तुरंत वापस ले ले।
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100 करोड़ फीस पर सवाल
जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि पिछले छह वर्षों में वकीलों को करोड़ों रुपये फीस दी गई, जिसमें अकेले अटॉर्नी जनरल तुषार मेहता को एक पेशी के लिए 25 लाख रुपये और अन्य वरिष्ठ वकीलों को 20-22 लाख रुपये तक दिए गए। यह फीस तब भी दी जाती रही जब उस दिन कोर्ट में बहस नहीं हुई।
कांग्रेस की कानूनी रणनीति
पटवारी ने बताया है कि कांग्रेस अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में अवमानना याचिका दाखिल करने जा रही है। इसके पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा अदालत में पैरवी करेंगे। साथ ही, उन्होंने उन अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने OBC आरक्षण लागू नहीं होने दिया।
सरकार से मांग
जीतू पटवारी ने सरकार से अपील की है कि वे इस मामले को त्वरित समाधान दें और अनावश्यक खर्च से बचें। उन्होंने कहा कि OBC वर्ग के हितों की रक्षा के लिए निर्णय तुरंत लिया जाना चाहिए ताकि इस लंबित विवाद का समाधान हो सके और गरीब व पिछड़े वर्ग को न्याय मिले।
