Nitish Kumar government Bihar 2025 trends : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रुझानों में फिर से नीतीश सरकार की वापसी के संकेत मिले हैं। इस बार के चुनाव में एनडीए गठबंधन भारी बहुमत से सरकार बनाने की ओर बढ़ रहा है। शुरुआती रुझानों में एनडीए को 181 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि महागठबंधन के लिए यह आंकड़ा 59 पर ठहरा हुआ है। यह परिणाम जेडीयू सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की ओर संकेत कर रहे हैं, जबकि तेजप्रताप यादव पीछे हैं। रुझानों के अनुसार, ओसामा शहाब भी अपनी सीट पर आगे हैं।
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एनडीए की प्रबल स्थिति
बिहार में एनडीए का पलड़ा इस बार बहुत भारी दिखाई दे रहा है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अभी तक की स्थिति में एनडीए गठबंधन के सदस्य दल कुल 181 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। जेडीयू सबसे बड़ी पार्टी बनती दिख रही है। यह सत्तारूढ़ गठबंधन पिछले चुनाव की तुलना में मजबूत दिख रहा है, जिसे लेकर सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विश्लेषक उत्साहित हैं। मतगणना की प्रक्रिया में अभी भी समय है, लेकिन शुरुआती रुझान सरकार बनाने की संभावना को मजबूत कर रहे हैं।
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महागठबंधन की स्थिति
महागठबंधन, जिसमें प्रमुख रूप से राजद, कांग्रेस और वाम दल शामिल हैं, अभी भी विशाल चुनौती का सामना कर रहा है। शुरुआती रुझान में उसकी सीटें 59 पर हैं। हालांकि, कुछ सीटों पर वह पीछे चल रहा है। यह गठबंधन पिछली बार के मुकाबले कमज़ोर दिख रहा है, लेकिन अभी नतीजे स्पष्ट नहीं हैं। उम्मीदवारों और नेताओं की बयानबाजी में आशा व निराशा दोनों के संकेत हैं। महागठबंधन के नेता अभी भी अपने पक्ष में अंतिम परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं।
तेजप्रताप यादव और ओसामा की स्थिति
तेजप्रताप यादव अभी पिछड़ रहे हैं, लेकिन ओसामा शहाब बाजी मारे हुए हैं। ये दोनों क्षेत्रीय नेता अपने-अपने इलाकों में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। ओसामा की बढ़त ने महागठबंधन के बीच उत्साह पैदा किया है, वहीं तेजप्रताप की स्थिति अभी भी अनिश्चित है। अंतिम परिणाम में इस-जैसे नेताओं की भागीदारी किंगमेकर जैसी भूमिका में दिख सकती है।
कुल मिलाकर
बिहार में इस बार का चुनाव विशेष महत्व का है। एनडीए की सरकार स्पष्ट रूप से बनती दिखाई दे रही है, जो पिछले चुनाव से भी मजबूत स्थिति में है। महागठबंधन को अभी भी अपने प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद है। मतगणना अंतिम चरण में है, और अंतिम नतीजे आने के बाद बिहार की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह से बदल सकती है। यह चुनाव इस बात का संकेत है कि राज्य की जनता अपने राजनीतिक भरोसे और पिछले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए किस पार्टी को समर्थन देगी।
