नाइजीरिया में खून का सैलाब और ट्रम्प की सख्त चेतावनी
nigeria christians attack trump: अफ्रीका के सबसे बड़े देश नाइजीरिया में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। बीते आठ महीनों में ईसाई समुदाय पर हमलों ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनवरी से अगस्त तक 7,000 से ज्यादा ईसाइयों की हत्या की जा चुकी है। इन हमलों के पीछे बोको हरम और फुलानी चरमपंथी संगठन बताए जा रहे हैं।

अब अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नाइजीरिया को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईसाइयों की हत्याएं नहीं रुकीं, तो अमेरिका नाइजीरिया को दी जाने वाली आर्थिक और सैन्य सहायता तुरंत रोक देगा। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा
अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिका गन के साथ उतरेगा। हम उन आतंकियों को खत्म करेंगे जो निर्दोष ईसाइयों पर हमला कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को संभावित कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं।
धार्मिक संघर्ष या राजनीतिक साजिश?
नाइजीरिया की आबादी लगभग बराबर हिस्से में मुस्लिम और ईसाई समुदायों में बंटी है। देश के उत्तरी इलाकों में कई दशकों से धार्मिक और जातीय हिंसा की घटनाएं होती रही हैं। बोको हरम जैसे आतंकी संगठन खुद को इस्लाम के नाम पर हिंसा का औजार बनाते रहे हैं।
कई बार इन हमलों की वजह धार्मिक टकराव नहीं बल्कि जमीन और सत्ता पर संघर्ष भी रही है। मगर जब चर्चों पर हमले होते हैं और सैकड़ों परिवार मारे जाते हैं, तो पूरी दुनिया में इसका धार्मिक कोण उभर आता है।
इसी वजह से अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज और कई मानवाधिकार संगठनों ने अमेरिकी कांग्रेस से मांग की है कि नाइजीरिया को दोबारा “Religious Freedom Violator” यानी धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाला देश घोषित किया जाए।
नाइजीरियाई सरकार का जवाब– ‘यह धार्मिक उत्पीड़न नहीं’
इन घटनाओं के बीच नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद टिनुबू ने बयान दिया कि देश को धार्मिक रूप से असहिष्णु बताना गलत है। उन्होंने कहा
“नाइजीरिया में हर धर्म को समान सम्मान और सुरक्षा दी जाती है। यहां किसी भी समुदाय के खिलाफ सरकारी स्तर पर कोई उत्पीड़न नहीं है।”
सरकार ने दावा किया कि सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति से हों। हालांकि, ग्राउंड रिपोर्ट्स कुछ और कहानी बयां करती हैं। उत्तर और मध्य नाइजीरिया के कई इलाकों में गांवों को जला दिया गया, चर्चों को निशाना बनाया गया, और लोगों को उनके धार्मिक पहचान के आधार पर मारा गया।
ट्रम्प का हस्तक्षेप राजनीति?
कई विश्लेषक ट्रम्प के इस बयान को अमेरिकी चुनावों से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि ट्रम्प हमेशा से धार्मिक मुद्दों पर सख्त रुख दिखाकर अपने वोट बैंक को मजबूत करते हैं। लेकिन कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल राजनीति नहीं, बल्कि मानवाधिकारों की वैश्विक चिंता भी है। ट्रम्प ने कहा
ईसाईयों पर हो रहे ये अत्याचार मानवता पर हमला हैं। अमेरिका चुप नहीं रहेगा।
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