NH-74 घोटाले का पर्दाफाश
एनएच-74 घोटाला 2017 में तब सामने आया, जब यह खुलासा हुआ कि राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजे के रूप में करोड़ों रुपये का गबन किया गया। इस मामले में डीपी सिंह, जो उस समय भूमि अधिग्रहण के सक्षम प्राधिकारी थे, पर आरोप है कि उन्होंने कृषि भूमि को गैर-कृषि दिखाकर और बैकडेटेड आदेश जारी करके सरकार को 162.5 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। ईडी ने 2024 में सिंह और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, और अब ताजा छापेमारी से इस मामले में नए साक्ष्य जुटाने की कोशिश की जा रही है। काशीपुर में अशरफ सिद्दीकी के आवास पर गुप्त रूप से की गई कार्रवाई में भी दस्तावेजों की जांच की गई।

NH-74 Scam: देहरादून और उधमसिंह नगर में छापेमारी
ईडी ने देहरादून में डीपी सिंह, जो वर्तमान में दून के डोईवाला शुगर मिल के कार्यकारी निदेशक हैं, के राजपुर स्थित आवास पर छापेमारी की। इसके अलावा, उधमसिंह नगर के काशीपुर में वकील अशरफ सिद्दीकी के ठिकानों पर भी कई घंटों तक तलाशी चली। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कुल नौ ठिकानों पर यह सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जांच में फोकस 2011 से 2016 के बीच हुए वित्तीय अनियमितताओं पर है, जिसमें कृषि भूमि को गैर-कृषि दिखाकर मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ाने का आरोप है। ईडी ने इस मामले में पहले भी कई संपत्तियों को जब्त किया है, जिसमें देहरादून, उधमसिंह नगर और उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्थित जमीनें और बैंक खाते शामिल हैं।

250-300 करोड़ रुपये का गबन
ईडी की यह कार्रवाई उत्तराखंड के सबसे बड़े घोटालों में से एक माने जाने वाले एनएच-74 मामले में महत्वपूर्ण कदम है। इस घोटाले में कुल 250-300 करोड़ रुपये के गबन की आशंका है। डीपी सिंह पहले भी इस मामले में 14 महीने जेल में रह चुके हैं, और उनके खिलाफ विशेष जांच दल (एसआईटी) ने भी 2019 में चार्जशीट दाखिल की थी। इस ताजा कार्रवाई से घोटाले के अन्य पहलुओं, जैसे मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध संपत्ति अर्जन, की जांच को और गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोग और प्रशासन इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह घोटाला न केवल सरकारी खजाने को बल्कि किसानों के हितों को भी प्रभावित करता है। ईडी की अगली सुनवाई 13 नवंबर को विशेष अदालत में होगी।
अकरम चौधरी की रिपोर्ट
