
नेपाल में हालिया हिंसा और उसके बाद की राजनीतिक उथल-पुथल ने एक नई दिशा और नेतृत्व को जन्म दिया है। जब 51 लोग इस हिंसा का शिकार हुए, जिसमें एक भारतीय महिला भी शामिल थी, तो यह सवाल उठता है—क्या यह घटना केवल एक राजनीतिक उथल-पुथल है, या फिर यह एक गहरी सामाजिक-राजनीतिक चेतावनी भी है?
शहीदों के लिए मुआवजा और सरकार का संकल्प
नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने हिंसा के पीड़ितों के परिवारों के लिए 10 लाख नेपाली रुपए के मुआवजे का ऐलान किया है। इसके साथ ही, उन्होंने हिंसा में मारे गए लोगों को शहीद घोषित करने का भी वादा किया। कार्की का कहना है, “यह हिंसा एक आपराधिक कृत्य है, और इसकी पूरी जांच की जाएगी। हम न केवल उन लोगों के परिवारों को सहायता देंगे, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।”
इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वह 6 महीने से ज्यादा समय तक सत्ता में नहीं रहेंगी और चुनाव के बाद सत्ता नवनिर्वाचित संसद को सौंप देंगी। उनका यह कदम एक नई राजनीति और जनता के विश्वास को पुनः स्थापित करने का प्रतीक माना जा रहा है।
राजनीतिक संकट और नए नेतृत्व की ओर बढ़ते कदम
हिंसा के बाद नेपाल में राजनीतिक संकट भी गहराया। तीन पूर्व प्रधानमंत्री, केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल प्रचंड को अपने घरों से बेघर होना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने 9 सितंबर को इन नेताओं के घरों में आग लगा दी। फिलहाल ये नेता अपने समर्थकों के साथ सेना के कैंपों में रह रहे हैं, और उनके समर्थक इनके लिए नए घर की तलाश में जुटे हैं।
इस राजनीतिक अस्थिरता के बीच, प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने अपनी सरकार बनाने का भी एलान किया। उनके मंत्रिमंडल में कानूनी विशेषज्ञों से लेकर ऊर्जा विशेषज्ञों तक कई नामों पर विचार किया जा रहा है, और इसमें Gen-Z आंदोलन के नेताओं को भी शामिल किया जा सकता है।

Gen-Z आंदोलन: युवाओं का ताकतवर संदेश
जनता का गुस्सा साफ तौर पर सामने आया है, खासकर Gen-Z आंदोलन के दौरान। इस आंदोलन ने न सिर्फ राजनीतिक नेताओं को चुनौती दी, बल्कि यह नेपाल के युवा वर्ग की आवाज बनकर उभरा। हालांकि, Gen-Z के नेता सरकार में शामिल होने से इंकार कर चुके हैं, वे अब सरकार के कामकाज की निगरानी करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके साथ किए गए वादे पूरे हों।
इसके अलावा, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा संसद भंग करने का फैसला भी जनजातियों और राजनीतिक दलों के बीच विवादों का कारण बना। पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली और उनकी पार्टी ने इस फैसले का विरोध करते हुए सड़कों पर उतरने का ऐलान किया है।
भारत का समर्थन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुशीला कार्की की नियुक्ति को महिला सशक्तिकरण के एक अहम प्रतीक के रूप में देखा। मोदी ने कहा, “नेपाल की जनता ने मुश्किल समय में लोकतंत्र पर विश्वास रखा और भारत हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा। अब नेपाल के पुनर्निमाण में युवाओं को योगदान देना होगा।”
नेपाल के भविष्य की दिशा
नेपाल की इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, यह साफ है कि देश में बदलाव की आवश्यकता है। सुशीला कार्की का नेतृत्व और उनकी योजनाओं में एक नई आशा दिखाई दे रही है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जनसंख्या की आवाज़, खासकर युवा वर्ग, इस बदलाव का हिस्सा बनेगी। हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों को मिले मुआवजे और शहीदों की घोषणा से एक संवेदनशील राजनीतिक कदम उठाया गया है, जो भविष्य में नेपाल के लिए एक नई शुरुआत हो सकता है।
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