Naxalite ceasefire talk 2025 : प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) ने हाल ही में अपने हथियार डालकर सरकार से बातचीत करने की इच्छा जताई है। माओवादी केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने एक महीने के लिए औपचारिक सीजफायर की मांग की है और सुरक्षा अभियान रोकने का आग्रह किया है। इसके तहत माओवादी जेल में बंद साथियों से भी संपर्क साधना चाहते हैं ताकि सभी की सहमति लेकर शांति वार्ता शुरू की जा सके।
वीडियो कॉल के माध्यम से वार्ता की तैयारी
माओवादी ने विशेष रूप से सरकार से कहा है कि वे बातचीत के लिए वीडियो कॉल की सुविधा दें ताकि दोनों पक्षों के बीच संवाद बिना किसी बाधा के हो सके। उन्होंने कहा कि वे गृह मंत्री या उनके प्रतिनिधि से बातचीत करने को तैयार हैं, किंतु इसके लिए पार्टी के अन्य सदस्य एवं जेल में बंद सहयोगियों से सलाह-मशविरा करना आवश्यक है। इसलिए वे इस प्रक्रिया के लिए एक महीने का समय देना चाहते हैं।
सरकार की जांच और प्रतिक्रिया
छत्तीसगढ़ सरकार ने माओवादी के इस शांति प्रस्ताव की प्रामाणिकता जांचने की बात कही है। राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने संवाददाताओं से कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत बिना शर्त होनी चाहिए और इस प्रकार की शर्तों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि माओवादियों के लिए आत्मसमर्पण करना और पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाना ही सर्वोत्तम मार्ग होगा। हालांकि, सरकार बातचीत के प्रस्ताव की गंभीरता से जांच कर रही है।
नक्सली संघर्ष का नया मोड़
यह शांति पहल ऐसे समय आयी है जब केंद्रीय सुरक्षा बलों ने माओवादी छावनियों पर तीव्र कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में पार्टी की शीर्ष कमान के कई वरिष्ठ नेता मारे गए हैं। माओवादी का यह फैसला न केवल उनके लिए बल्कि देश की नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस प्रस्ताव को किस तरह स्वीकार करती है और शांति प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ती है।
इस बदलाव से उम्मीद जगी है कि अगले कुछ महीनों में देश में नक्सल समस्या के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे व्यापक सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.
