Naxalism eradication 2026 : छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में सुरक्षाबलों ने बड़ी सफलता हासिल की है। अबुज्माड़ क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के दो केंद्रीय कमेटी सदस्य राजू दादा उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी और कोसा दादा उर्फ कादरी सत्यनारायण रेड्डी को ढेर कर दिया गया। इन दोनों नक्सलियों पर 40-40 लाख रुपये का भारी इनाम था। सुरक्षाबलों ने इस ऑपरेशन में भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक सामग्री और माओवादी साहित्य भी बरामद किया है।
सुरक्षाबलों की रणनीति
सुरक्षाबलों ने अबुज्माड़ के जंगलों में सर्चिंग अभियान चलाया। और नक्सलियों ने जवानों पर अचानक हमला किया, लेकिन सुरक्षाबलों ने तत्परता से जवाबी कार्रवाई की और दोनों नक्सली नेताओं को ढेर कर दिया। मुठभेड़ के दौरान दोनों तरफ से गोलीबारी जारी रही। सुरक्षाबल प्रमुखों के अनुसार, यह कार्रवाई नक्सलियों के नेतृत्व को कमजोर करने की बड़ी कामयाबी है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का बयान
इस सफलता पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने हुंकार लगाते हुए कहा है कि 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा। उन्होंने सुरक्षाबलों की कड़ी मेहनत और रणनीतिक प्रयासों की सराहना की।
Naxalism eradication 2026 : सुरक्षाबलों की लगातार अभियान की स्थिति
2025 में अब तक छत्तीसगढ़ में हुई मुठभेड़ों में कुल 248 नक्सलियों को मार गिराया गया है, जिनमें से 219 नक्सली बस्तर संभाग के 7 जिलों में मारे गए हैं, जिनमें नारायणपुर भी शामिल है। रायपुर संभाग के गरियाबंद जिले में भी 27 नक्सली ढेर किए गए हैं। सुरक्षा बल नक्सली ठिकानों और उनके उच्च नेतृत्व के विरुद्ध कड़े अभियान जारी रखे हुए हैं जिससे देश को 2026 तक पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाया जा सके।

नक्सलवाद पर केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस सफलता को एक बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा है कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना है। सुरक्षाबल नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, लेकिन जो नहीं मान रहे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। यह अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रदेश की शांति व्यवस्था के लिए अत्यंत जरूरी है।
नारायणपुर में मिली इस सफलता से न केवल नक्सलियों के दमन में मजबूती आई है, बल्कि यह प्रदेश में कानून-व्यवस्था के पक्ष में भी मजबूती का संकेत है। सुरक्षाबल लगातार इलाके में सक्रिय हैं और अन्य नक्सली घटकों पर भी नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में और भी बड़े ऑपरेशन की उम्मीद जताई जा रही है जिससे 2026 तक नक्सलवाद का सफाया संभव हो सके।

