थनौद में हर साल बनती हैं 5000 से ज्यादा मूर्तियां
Navratri Festival:गणेश चतुर्दशी के बाद अब 3 अक्टूबर से नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। जिसको लेकर तैयारियां शुरु हो गई है.मूर्तिकार देवी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे हुए है… हम आपको छत्तीसगढ़ के दुर्ग में मूर्तियों के गांव थनौद ले चलते है. जहां हर घर मिट्टी की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। यहां बनी मूर्तियों की देशभर में डिमांड है।
थनौद में 200 से 2 लाख तक मूर्ति
थनौद में 200 रुपए से लेकर 2 लाख रुपए तक की मूर्तियां बनती हैं। मूर्तिकार प्रतिमाओं के लिए पहले वेश्यालय से मिट्टी लाते हैं, फिर माता रानी की मूर्तियों को आकार देते हैं। नवरात्रि शुरू होने से पहले भास्कर की टीम भिलाई से 20 किलोमीटर दूर थनौद गांव पहुंची। इनमें करीब 60 घर के ही कुम्हार मूर्ति बनाने का काम करते हैं। गांव में तीन चार बड़े मूर्तिकार हैं, जिसमें सबसे पुराना नाम बालम चक्रधारी का आता है।इसके साथ ही दूसरा बड़ा नाम राधे और गिरधर चक्रधारी का आता है। यहां के लोग लगभग 100 साल से मूर्तियां बना रहे हैं।
Navratri Festival:वेश्या के पैर के नीचे की मिट्टी लाते हैं
राधे चक्रधारी के मुताबिक मां दुर्गा की प्रतिमा के लिए वेश्या और किन्नर के पैर के नीचे की मिट्टी लाकर मिलाना पड़ता है। माता रानी अर्धनारीश्वर का रूप होती हैं।साल में एक बार वह वेश्या को पैसे देकर पैर के नीचे की मिट्टी खोदकर लाते हैं। किन्नर उनके पंडाल में मूर्ति देखने आते हैं तभी उनके पैर के नीचे की मिट्टी खोदकर रख लिया जाता है। इसके बाद उस मिट्टी को काफी पवित्रता के साथ रखा जाता है। बाद में उसे ढेर सारी मिट्टी के घोल में मिला दिया जाता है। फिर उससे प्रतिमा तैयार की जाती है।
Navratri Festival:प्रदेश के बाहर भी मूर्तियों की डिमांड
मूर्तिकार दिलीप यादव का कहना है कि वह लोग कस्टमर की डिमांड पर मूर्ति बनाते हैं। इस बार फाइबर की रथ पर बैठी माता की मूर्ति बनाई गई है।उनके यहां बनी मूर्ति ओडिशा, गोंदिया, महाराष्ट्र के मेयर अशोक इंगले, रायपुर में केदार गुप्ता और भिलाई में महापौर नीरज पाल जैसे बड़े बड़े लोगों के यहां जाती हैं।
