नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप का शुभारंभ
रुड़की स्थित कोर यूनविर्सिटी में आयोजित उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ये प्रतियोगिता केवल खेल आयोजन नहीं बल्कि भारत की उस अदम्य इच्छाशक्ति का उत्सव है, जो हर चुनौती को अवसर में बदल देती है। उन्होंने कहा कि पावरलिफ्टिंग अपने आप में अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास का प्रतीक है, ये खेल केवल ताकत ही नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की अद्वितीय मिसाल है।

‘खिलाड़ी देश का नाम कर रहे रोशन’
CM Dhami Paralympic Powerlifting Championship: CM धामी ने कहा कि भारत के दिव्यांग भाई-बहन, आज प्रत्येक क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर ने 1972 के ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक की तैराकी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। इसी कड़ी में सत्येंद्र सिंह लोहिया पहले ऐसे भारतीय दिव्यांग खिलाड़ी बने, जिन्होंने 12 घंटे में इंग्लिश चैनल को तैरकर पार किया। भारत की पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने विश्व पैरा तीरंदाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर ये साबित कर दिया कि कमजोरी को ताकत बनाया जा सकता है।

CM Dhami Paralympic Powerlifting Championship: भारतीय खिलाड़ी किसी से कम नहीं – CM
CM ने आगे कहा – इसी तरह दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम ने कोलंबों में T20 ब्लाइंड वूमेन क्रिकेट वर्ल्ड कप-2025 जीतकर भारत का नाम रोशन किया है। टोक्यो पैरालंपिक में अवनी लेखरा ने शूटिंग और सुमित अंतिल ने जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीता। इतना ही नहीं, वर्ष 2024 में तो पेरिस में आयोजित पैरालिंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने 29 पदक जीतकर इतिहास रचा दिया था, इसी के साथ ही 2025 में दुबई में हुई एशियन यूथ पैरा गेम्स में 110 पदक जीतकर पूरे विश्व को ये बता दिया कि भारतीय पैरालंपिक खिलाड़ी किसी से कम नहीं हैं।
