नेशनल हेराल्ड केस में आज की सुनवाई
कभी इस देश के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार के नाम के आगे सवालिया निशान लगाना सोचना भी मुश्किल था। लेकिन आज, दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में वो सुनवाई हो रही है, जो सोनिया गांधी और राहुल गांधी की किस्मत तय कर सकती है।

नेशनल हेराल्ड केस में ED की चार्जशीट पर अदालत संज्ञान लेगी या नहीं, इस पर फैसला आने वाला है। और अगर अदालत आगे बढ़ी, तो सोनिया और राहुल गांधी पर औपचारिक रूप से आरोप तय हो सकते हैं।
क्या है नेशनल हेराल्ड केस?
यह मामला 2012 में सामने आया, जब BJP नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली की अदालत में याचिका दायर की। उनका आरोप था कि नेशनल हेराल्ड अखबार, जो कभी पंडित नेहरू ने शुरू किया था, उसे कांग्रेस नेताओं ने एक चालाकी भरी स्कीम के जरिए हड़प लिया।
स्वामी का दावा था • एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL), जो इस अखबार को चलाता था, को कांग्रेस ने 90 करोड़ रुपये का कर्ज दिया। AJL वो कर्ज चुकाने में असमर्थ रही। फिर सोनिया और राहुल ने यंग इंडियन लिमिटेड (YIL) नाम की एक कंपनी बनाई और AJL को मात्र 50 लाख में टेकओवर कर लिया। यानी, करीब 2000 करोड़ की संपत्ति पर कब्जा, सिर्फ 50 लाख में! सोनिया और राहुल की यंग इंडियन लिमिटेड में 76% हिस्सेदारी है। यानी मामला गंभीर है।
ED का दावा: मनी लॉन्ड्रिंग हुई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2023 में अपनी चार्जशीट फाइल की, जिसमें बताया ये “लोन ट्रांजैक्शन” सिर्फ एक दिखावा था। AJL से वास्तव में कोई पैसे का लेनदेन नहीं हुआ। यंग इंडियन को इस तरह से सामने लाया गया कि सिर्फ संपत्ति पर नियंत्रण हासिल हो सके।
ED ने इस आधार पर ₹661 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने के लिए नोटिस भी जारी किया। मुंबई के बांद्रा, दिल्ली के बहादुर शाह ज़फर मार्ग स्थित हेराल्ड हाउस समेत कई जगहों की प्रॉपर्टी इसके दायरे में आई।
कोर्ट क्या फैसला सुना सकती है?
29 जुलाई को कोर्ट ने चार्जशीट पर फैसला टालते हुए कहा था कि ED को कुछ बातों पर और स्पष्टीकरण देना होगा। अब 8 और 10 अगस्त को इस पर गंभीर बहस के बाद तय होगा कि क्या चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाए? क्या सोनिया और राहुल गांधी पर आधिकारिक आरोप तय हों? अगर हां, तो यह केस आगे आपराधिक मुकदमे के रूप में बढ़ेगा।

राहुल गांधी से 50 घंटे, सोनिया से 12 घंटे की पूछताछ
2022 में ED ने इस मामले में गहराई से जांच की। राहुल गांधी से 5 दिन में करीब 50 घंटे की पूछताछ हुई। सोनिया गांधी से 3 दिन में 12 घंटे, और 100 से अधिक सवाल पूछे गए। ये सिर्फ जांच नहीं, कांग्रेस के लिए एक राजनीतिक ज्वालामुखी थी, जिसने पार्टी की छवि और नैरेटिव दोनों को चुनौती दी।
नेशनल हेराल्ड केस क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
यह केस सिर्फ कानूनी नहीं, राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बड़ा है यह भारत के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार के वित्तीय व्यवहार पर सवाल उठाता है। यह जांच एजेंसियों की निष्पक्षता और राजनीतिक दबाव के आरोपों के बीच संतुलन की परीक्षा है। यह कांग्रेस की भविष्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है—चुनावों में, संसद में, और जनता की नज़रों में।
कांग्रेस कहती है ‘प्रतिशोध’, BJP कहती है ‘न्याय’
कांग्रेस का दावा है कि यह पूरा मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। वहीं BJP का कहना है कि कानून सभी के लिए बराबर है “कोई भी इतना बड़ा नहीं कि जांच से ऊपर हो।”

आगे क्या होगा?
सवाल कई हैं, जवाब कम। क्या अदालत राहुल और सोनिया को क्लीन चिट देगी? या यह केस अब नए मोड़ पर बढ़ेगा और लंबी सुनवाई का कारण बनेगा? जो भी हो, आज की तारीख, 8 अगस्त 2025, भारतीय राजनीति के इतिहास में दर्ज हो सकती है।
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