महुआ बीनने से लेकर बेचने तक का संघर्ष
Mahua Collection for Livelihood: गर्मियों का मौसम आते ही जंगलों में महुआ के फूल गिरने का सिलसिला शुरू हो जाता है। Nation Mirror की टीम उन ग्रामीणों के बीच पहुंची जो हर सुबह तड़के जंगलों में महुआ बीनने निकलते हैं। महुआ बीनना सिर्फ एक परंपरा नहीं बल्कि इन लोगों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण जरिया भी है।
महुआ गिरने का खास मौसम
महुआ का मौसम मुख्यत मार्च से मई तक रहता है। इस दौरान सर्दी के मुकाबले गर्मी में महुआ ज्यादा मात्रा में गिरता है। रहवासी सुबह जल्दी जंगल पहुंचते हैं ताकि ताजे गिरे हुए महुआ को इकट्ठा कर सकें, इससे उसकी गुणवत्ता बनी रहती है।

महुआ को चोरों और जानवरों से बचाने का देशी जुगाड़
ग्रामीणों को महुआ बीनने के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जानवरों और कभी-कभी चोरों से महुआ को बचाने के लिए लोग देशी उपाय करते हैं। वे रात को भी निगरानी रखते हैं और पेड़ों के नीचे घेराबंदी कर देते हैं ताकि महुआ सुरक्षित रहे।
महुआ से बनते हैं स्वादिष्ट पकवान
महुआ केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि स्थानीय खानपान का भी अभिन्न हिस्सा है। महुआ से कई स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं। खासतौर पर दही और चने की दाल के साथ महुआ को मिलाकर खाने का स्वाद अनूठा होता है जो गांव की पारंपरिक थाली का विशेष हिस्सा है।
रोजगार का मजबूत जरिया बना महुआ
महुआ को इकट्ठा कर ग्रामीण स्थानीय बाजारों में बेचते हैं। इससे उन्हें अच्छा खासा पैसा मिल जाता है, जो उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है। कई परिवार महुआ के सहारे अपना गुजर-बसर करते हैं। महुआ के फूल से कई औषधीय उत्पाद और शराब भी बनाई जाती है, जो रोजगार के अतिरिक्त अवसर भी प्रदान करती है। इसके अलावा महुए के पेड़ से डोरी जैसे फल भी गिरते है जिससे गांव के लोग मशीन की मदद से तेल निकलवाकर खानें और शरीर में लगाने के काम आता है।
जंगल से जीवन तक एक मजबूत रिश्ता
Mahua Collection for Livelihood: जंगल में महुआ बीनना इन रहवासियों के जीवन का अहम हिस्सा है। यह सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव भी है। महुआ के मौसम में पूरा गांव एक नई ऊर्जा के साथ जीता है और अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजता है।
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