Nasha Mukt Punjab: पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही जंग अब सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक सामाजिक बदलाव की कहानी बनती जा रही है। राज्य सरकार के ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान ने अब नशा छोड़ चुके युवाओं को रोजगार और सम्मानजनक जीवन से जोड़कर नई उम्मीद जगाई है।
नशा मुक्ति के साथ दिया जा रहा रोजगार पर जोर
अधिकारियों के मुताबिक, पंजाब सरकार का यह अभियान अब बहुआयामी रूप ले चुका है। इसमें नशे के खिलाफ सख्ती के साथ-साथ पीड़ितों के इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खास बात यह है कि उपचार के बाद युवाओं को रोजगार के अवसर भी दिए जा रहे हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।

पंजाब सरकार का मानना है कि केवल इलाज से समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि आर्थिक स्थिरता ही नशा मुक्ति को स्थायी बनाती है।
जमीनी स्तर पर दिख रहा असर
बताते चलें कि राज्य के विभिन्न जिलों में अब ऐसे कई उदाहरण सामने आ रहे हैं, जहां नशे की गिरफ्त में रहे युवा सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। परिवारों का सहयोग और संस्थागत मदद उन्हें नई दिशा दे रही है।
एक युवक, जिसने नशे के कारण अपना जीवन और पारिवारिक संबंध खो दिए थे, अब रोजगार मिलने के बाद फिर से आत्मविश्वास के साथ जीवन जी रहा है। इसी तरह कई युवाओं ने पुनर्वास सेवाओं के जरिए नई शुरुआत की है।
पुनर्वास से हो रही आत्मसम्मान की वापसी
ऐसे मामलों में विशेषज्ञों का कहना है कि रोजगार केवल आर्थिक साधन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और सामाजिक स्वीकार्यता का माध्यम भी है। नौकरी मिलने के बाद पंजाब के युवा न सिर्फ अपने पैरों पर खड़े हो रहे हैं, बल्कि परिवार और समाज से फिर से जुड़ पा रहे हैं। पंजाब में भगवंत मान की सरकार की यह रणनीति नशा मुक्ति को एक दीर्घकालिक समाधान के रूप में स्थापित कर रही है।
समाज में दिखाई दे रहे सकारात्मक बदलाव के संकेत
‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान के तहत सामने आ रही सफलता की कहानियां इस बात का संकेत हैं कि पंजाब धीरे-धीरे नशामुक्त समाज की ओर बढ़ रहा है। यह पहल अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और पुनर्निर्माण का आंदोलन बनती जा रही है।
