Narak Chaturdashi 2025: दीपावली से एक दिन पहले आने वाली नरक चतुर्दशी या रुप चौदस, जिसे छोटी दीपावली भी कहा जाता है, धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है।
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शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन किए गए शुभ कर्म, पूजा और उपाय व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य, स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि लाते हैं। इस दिन सुबह सवेरे अभ्यंग स्नान किया जाता है। शाम को दीपदान किया जाता है, ऐसा करने से पापों का नाश हो जाता है और दीर्घायु का वरदान मिलता है।
तिल तेल से अभ्यंग स्नान करें…
नरक चतुर्दशी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूरे शरीर पर तिल का तेल लगाकर मालिश करें और उसके बाद उबटन से स्नान करें। इसे अभ्यंग स्नान कहा गया है। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, पापों का नाश होता है और दीर्घायु का वरदान मिलता है।

यम दीपदान अवश्य करें…
संध्या समय घर के बाहर, विशेषकर दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक जलाएं। इसे यमदीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन यमदीप जलाता है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और आयु, स्वास्थ्य व मानसिक शांति मिलती है।

यमराज की पूजा करें…
इस दिन तिल, जल और दीप अर्पित कर “ॐ यमाय नमः” मंत्र का जाप करें। यमराज की पूजा से मृत्यु के भय का नाश होता है और जीवन में संतुलन आता है। साथ ही, इससे पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है।
दीपदान से घर को करें प्रकाशित…
पूरे घर में दीपक जलाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूजा स्थल, मुख्य द्वार, रसोई और तुलसी के पौधे के पास दीपक अवश्य जलाएं। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
लक्ष्मी-कुबेर की संयुक्त आराधना…
सायंकाल में मां लक्ष्मी और धनाध्यक्ष कुबेर की पूजा करें। 11 दीपक जलाकर मंत्रों का जाप करें—
“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः”
“ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः”
इससे धन, वैभव और समृद्धि में वृद्धि होती है।
दान-पुण्य करें…
जरूरतमंदों को दीपक, तेल, वस्त्र, अन्न या तिल का दान करना शुभ माना गया है। दान करने से दरिद्रता दूर होती है और घर में लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है। शास्त्रों में कहा गया है, “दानं धर्मस्य कारणम्”—दान ही धर्म की जड़ है।
घर के मुख्य द्वार पर दीप सजाएं….
सायंकाल के समय घर के प्रवेश द्वार पर दीपों की पंक्ति जलाएं। मान्यता है कि देवी लक्ष्मी उन घरों में स्थायी रूप से निवास करती हैं जहां दीपक जगमगाते हैं। घर को दीपों की रोशनी से प्रकाशित कर लक्ष्मी का स्वागत करें।

