NAN scam Alok Shukla surrender controversy : छत्तीसगढ़ के नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) में फरवरी 2015 में करोड़ों के घोटाले का मामला सामने आया था। घोटाले की जांच में पता चला कि सरकारी खरीद, वितरण प्रणाली और संविदा में भ्रष्टाचार हुआ और इसमें चावल व नमक जैसी सामग्रियों की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई थी। ACB व EOW की छापेमारी में 3.64 करोड़ रुपए नगद और कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी मिले थे।
कोर्ट में सरेंडर: क्यों लौटाए गए आलोक शुक्ला?
रिटायर्ड IAS आलोक शुक्ला जब रायपुर स्पेशल कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे, तो कोर्ट ने उन्हें यह कहते हुए लौटा दिया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी आधिकारिक रूप से जारी नहीं हुआ है। कोर्ट ने साफ कहा कि अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद भी जब तक सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर नहीं मिलेगा, तब तक सरेंडर की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व IAS अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला दोनों की हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया है। कोर्ट के मुताबिक दोनों को पहले दो हफ्ते ईडी की कस्टडी और फिर दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में रहना होगा, इसके बाद ही जमानत की पात्रता मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को तीन और EOW को दो महीने में पूरी जांच करने का आदेश भी दिया है।
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NAN scam Alok Shukla surrender controversy :अदालत और एजेंसियों की भूमिका
आलोक शुक्ला का सरेंडर स्थगित हो गया है, अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक आदेश और स्पेशल कोर्ट की अगली प्रक्रिया पर टिकी हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद अब जांच एजेंसियां आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए स्वतंत्र हैं और कानूनी अड़चनों को दूर किया जा चुका है।
नान घोटाले में अधिकारियों की भूमिका
एफआईआर के अनुसार, आलोक शुक्ला और अन्य पद के दुरुपयोग तथा जांच को प्रभावित करने का आरोप है। आरोपियों ने तत्कालीन महाधिवक्ता की मदद से घोटाले में सरकारी सिस्टम का दोहन किया और आर्थिक लाभ उठाया।
रायपुर स्पेशल कोर्ट ने पूर्व IAS आलोक शुक्ला का सरेंडर सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक आदेश के बिना अस्वीकार कर दिया है, जिससे अब कार्रवाई की अगली कड़ी सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कॉपी और पुन: कोर्ट में पेशी पर निर्भर होगी। इससे नान घोटाले की जांच और गिरफ्तारियों का रास्ता साफ हो चुका है।
