बिहार सरकार की साख पर सवाल
बिहार के नालंदा में बुधवार को जो हुआ, उसने जनता और सत्ता के बीच की खाई को उजागर कर दिया। गांव मलामा में सड़क हादसे में मारे गए 9 लोगों के परिवारों से मिलने पहुंचे मंत्री श्रवण कुमार और विधायक कृष्ण मुरारी को उसी जनता ने दौड़ा दिया, जिसके लिए वो संवेदना प्रकट करने आए थे।

घटना का पूरा घटनाक्रम: क्रोध, पीड़ा और टूटता भरोसा
सुबह 10 बजे: शोक संवेदना के साथ शुरुआत
मंत्री श्रवण कुमार और विधायक कृष्ण मुरारी, मलामा गांव पहुंचे। मृतकों के घर गए, संवेदना व्यक्त की, मुआवज़े का वादा भी किया।
दोपहर: नेताओं के जाने की तैयारी और गुस्से की चिंगारी
जैसे ही नेताओं ने प्रस्थान की बात कही, ग्रामीणों को लगा कि फिर वही आश्वासन, न कोई ठोस ऐलान। भीड़ ने रुकने की गुहार लगाई, लेकिन मंत्री बोले अब हमें आगे बढ़ना है, कार्यक्रम हैं। बस यहीं से क्रोध ज्वालामुखी बन गया।
लाठी-डंडे निकले, नेता भागे
भीड़ ने पहले विधायक और पत्रकार को घेरा। फिर अचानक लाठी-डंडों के साथ दौड़ शुरू हुई। मंत्री धोती संभालते हुए करीब 1 किलोमीटर तक भागे, 3 बार गाड़ियां बदलीं।
पुलिस और बॉडीगार्ड्स की जान पर खेल कर बचाव
भीड़ ने गाड़ियों पर पत्थर और डंडे बरसाए। बॉडी गार्ड्स भी घायल हुए। दोनों नेताओं को तीसरी गाड़ी में किसी तरह गांव से निकाला गया।
मंत्री का बयान: बिहार में ऐसा होता रहता है
घटना के बाद मंत्री श्रवण कुमार ने कहा
बिहार में ऐसा होता रहता है। लोग दुख में होते हैं, भावनाएं भड़क जाती हैं।
लेकिन क्या यह सामान्यीकरण सही है?
क्या लोकतंत्र में जनता की बात सुनना इतना मुश्किल हो गया है कि नेता सुरक्षा घेरे में भी असुरक्षित हो गए हैं?

बड़ी बातें और चिंताएं
| मुद्दा | विवरण |
|---|---|
| जनता का अविश्वास | गांववालों ने साफ कहा — “विधायक ने मुआवज़े का वादा किया था, आज तक कुछ नहीं हुआ।” |
| मंत्री का व्यवहार | शोक-संवेदना को रिवाज की तरह निभा कर निकलना लोगों को बेइमानी लगा। |
| बढ़ती घटनाएं | 3 दिनों में यह दूसरी घटना है — इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे पर पत्थराव हुआ था। |
| कानून व्यवस्था पर सवाल | गृह जिला होने के बावजूद नालंदा में यह घटना शासन पर सवाल उठाती है। |
क्या कहता है यह सब बिहार की राजनीति के बारे में?
जनता का सब्र अब जवाब दे रहा है। राजनीतिक प्रतिनिधियों के लिए केवल दिखावटी दौरे अब काफी नहीं। नीतीश कुमार की सरकार को ज़मीनी सच्चाई समझनी होगी।
अब आगे क्या?
FIR और जांच: गांव में भारी पुलिस तैनात है, वीडियो फुटेज से हमलावरों की पहचान हो रही है।
मुआवज़े की नई मांग: मृतकों के परिजन तत्काल और लिखित आश्वासन चाहते हैं।
राजनीतिक दबाव: विपक्ष इस मामले को नीतीश सरकार की जनविरोधी छवि के रूप में भुनाने की तैयारी में है।
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