Nainital district election: नैनीताल जिला पंचायत चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका, निर्दलीयों का दबदबा
Nainital district election: नैनीताल जिले में हुए जिला पंचायत चुनावों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। पार्टी ने जिन 23 सीटों पर अपने प्रत्याशियों को समर्थन दिया था, उनमें से केवल 5 पर ही उसे जीत मिल सकी। 4 सीटों पर भाजपा के ही बागी उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि 15 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने बाजी मारी। समाचार लिखे जाने तक रामनगर क्षेत्र की तीन सीटों पर मतगणना जारी थी।

Nainital district election: कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज
यह हार भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसे आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा था। इससे पहले भी जनवरी 2025 में हुए निकाय चुनावों में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी और वह केवल नगर निगम हल्द्वानी की सीट जीत सकी थी, जबकि अन्य स्थानों पर कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी।
Nainital district election: पदाधिकारी लगातार प्रचार में जुटे रहे
नैनीताल जिले में जिला पंचायत की कुल 27 सीटें हैं। इनमें से 23 पर भाजपा ने अपने समर्थित उम्मीदवारों को चुनाव में उतारा, हालांकि इन्हें पार्टी का आधिकारिक चिन्ह नहीं दिया गया था। इन प्रत्याशियों के समर्थन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता जैसे सांसद अजय भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, सरिता आर्या, दीवान सिंह बिष्ट और राम सिंह कैड़ा समेत जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट और अन्य पदाधिकारी लगातार प्रचार में जुटे रहे।
Nainital district election: भाजपा को करारा झटका लगा
इसके बावजूद भाजपा समर्थित प्रत्याशी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। मतगणना के दौरान देखा गया कि कई जगहों पर पार्टी के बागी और स्वतंत्र उम्मीदवारों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे भाजपा को करारा झटका लगा।
उम्मीदवारों के चयन में चूक शामिल
Nainital district election: विशेषज्ञों के अनुसार, इस हार के पीछे कई कारण रहे। इनमें संगठन के पदाधिकारियों द्वारा प्रत्याशियों से दूरी बनाना, प्रशासन के जनविरोधी निर्णय, भाजपा नेताओं का अति आत्मविश्वास, टिकट वितरण में कार्यकर्ताओं की अनदेखी और उम्मीदवारों के चयन में चूक शामिल हैं।
औपचारिक समर्थन नहीं दिया
हालांकि पार्टी अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए भाजपा ने चुनाव जीत चुके निर्दलीय और बागी सदस्यों से समर्थन मांगा है और सूत्रों के अनुसार, इस दिशा में बातचीत सफल भी रही है। इसके अलावा उन सीटों पर भी भाजपा से जुड़े व्यक्ति जीते हैं, जिन्हें पार्टी ने औपचारिक समर्थन नहीं दिया था।
यह चुनाव परिणाम भाजपा के लिए आत्ममंथन का अवसर है और आने वाले चुनावों की रणनीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता को दर्शाता है।
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divya mistry
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