Mysterious Drone Sea Island Kolkata : क्या देश की सुरक्षा पर मंडरा रहा है खतरा?
Mysterious Drone Sea Island Kolkata : देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा बनते जा रहे रहस्यमयी उड़ते ड्रोन्स ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। कोलकाता के कई महत्वपूर्ण स्थानों पर बुधवार को संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों के एक दिन बाद, अब सागर द्वीप के आसमान में रहस्यमयी उड़ती रोशनी देखी गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह ड्रोन जैसी दिखने वाली चमकदार लाइट्स 10 से 15 मिनट तक आसमान में दिखाई दीं।
रात 1:30 बजे आसमान में चमकती रोशनी देखी
सागर द्वीप के पास के मौसनी द्वीप, बक्खाली और फ्रैसरगंज के निवासियों ने बताया कि आधी रात के बाद आसमान में कई चमकदार लाइट्स नजर आईं।
परिबाला गिरी, जो सागर द्वीप की बुजुर्ग निवासी हैं, ने कहा:
“मैं रात करीब 1:30 बजे बाहर निकली और कपिल मुनि मंदिर के पास आसमान में कई चमकती रोशनियाँ देखीं। ये उत्तर से दक्षिण दिशा में जा रही थीं। समझ नहीं आया ये क्या था, लेकिन अब डर लग रहा है।”
स्थानीय निवासी सাথि मैत्रा ने कहा,
“हमने पुलिस और प्रशासन को इसकी जानकारी दे दी है। मौजूदा माहौल को देखते हुए हमें सतर्क रहना होगा।”
पुलिस की पुष्टि और जांच शुरू
सुंदरबन पुलिस ज़िले के पुलिस अधीक्षक कोटेश्वर राव ने मीडिया को बताया:
“हमें जानकारी मिली है कि सागर द्वीप पर करीब 10 से 15 मिनट तक कुछ रहस्यमयी लाइट्स देखी गईं। ये लाइट्स दक्षिण से उत्तर की दिशा में जा रही थीं। हमने जांच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि ये ड्रोन थे या कुछ और।”
कोलकाता में एक दिन पहले भी हुई थी संदिग्ध ड्रोन गतिविधि
इस घटना से पहले बुधवार को कोलकाता के हेस्टिंग्स, बाबूघाट और प्रिंसेप घाट जैसे संवेदनशील इलाकों में भी रहस्यमयी ड्रोन देखे गए थे। इसके साथ ही इंडियन म्यूजियम और विक्टोरिया मेमोरियल के ऊपर भी उड़ती लाइट्स देखी गईं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए कोलकाता पुलिस और सेना दोनों सक्रिय हो गए। कोलकाता पुलिस के जॉइंट कमिश्नर (मुख्यालय) मिराज खालिद ने कहा कि मामले की जांच चल रही है और ईस्टर्न कमांड मुख्यालय को जानकारी दी गई है।
कड़े ड्रोन कानून और सुरक्षा नियम
कोलकाता पुलिस के अनुसार, शहर में ड्रोन उड़ाने के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके साथ ही, ड्रोन के उपयोग का कारण स्पष्ट होना चाहिए। बिधाननगर कमिश्नरेट द्वारा एन.एस.सी. बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध है, जो DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है।
ड्रोन या कुछ और? क्या भारत की हवाई सुरक्षा को चुनौती दी जा रही है?
सवाल उठता है कि इन रहस्यमयी उड़ती रोशनियों का मकसद क्या है? क्या ये वास्तव में ड्रोन थे? या यह भारत की सुरक्षा व्यवस्था की किसी बड़ी चुनौती का संकेत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों, धार्मिक स्थलों और संवेदनशील स्थानों पर बिना अनुमति उड़ते ड्रोन किसी खतरे से कम नहीं। देश पहले भी जम्मू, पंजाब और राजस्थान में सीमा के पास ड्रोन से जुड़ी कई घटनाओं का सामना कर चुका है, जिनमें हथियारों और ड्रग्स की तस्करी शामिल रही है।
स्थानीय लोगों में भय और प्रशासन पर दबाव
रहस्यमयी उड़ती लाइट्स की घटनाओं ने स्थानीय लोगों में डर का माहौल बना दिया है। मंदिर क्षेत्र जैसे धार्मिक स्थलों के ऊपर इस तरह की गतिविधि से जनभावनाएं भी आहत हो सकती हैं। प्रशासन पर अब दबाव है कि वह न सिर्फ जांच को तेज़ करे, बल्कि ऐसे क्षेत्रों की निगरानी भी बढ़ाए।
ड्रोन निगरानी के लिए टेक्नोलॉजी की ज़रूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि देश को अब एडवांस ड्रोन-डिटेक्शन टेक्नोलॉजी अपनाने की जरूरत है, ताकि ऐसी घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। कई विकसित देशों में पहले ही हवाई निगरानी के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम और राडार आधारित सिस्टम इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
क्या बढ़ेगी देश की सुरक्षा चुनौतियाँ?
कोलकाता और सागर द्वीप में लगातार दूसरी रात रहस्यमयी ड्रोन जैसी लाइट्स दिखना महज संयोग नहीं हो सकता। प्रशासन को अब बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है। जहां एक ओर सेना और पुलिस जांच में जुटी है, वहीं आम नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना प्रशासन को देनी चाहिए।
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