Mysteries Of Jagannath Temple: पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर न केवल भारत का बल्कि पूरे विश्व का एक अनोखा धार्मिक स्थल है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु रथ यात्रा में भाग लेते हैं। लेकिन इस मंदिर से जुड़ीं ऐसी कई पौराणिक कथाएं और चमत्कारी मान्यताएं हैं, जो आज भी विज्ञान के लिए रहस्य बनी हुई हैं। आइए जानते हैं इनकी पूरी जानकारी।
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भगवान जगन्नाथ और मंदिर का महत्व…
भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। यहां भगवान की पूजा उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ होती है। यह मंदिर चार धामों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
रथ यात्रा की धार्मिक महत्ता…
मौसी के घर की यात्रा…
मान्यता है कि, इस दिन भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर जाते हैं। भक्तों का मानना है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान अपने भक्तों के और निकट आ जाते हैं।
रथ की रस्सी खींचने से मिलता है पुण्य
ऐसा कहा जाता है कि, इस दिन अगर कोई भक्त भगवान के रथ की रस्सी खींचता है या उसे छूता है, तो उसे मोक्ष और पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु केवल इस दिव्य क्षण का अनुभव लेने के लिए पुरी पहुंचते हैं।
जानिए मंदिर से जुड़े रहस्य…
1. यमराज और तीसरी सीढ़ी का रहस्य…
पुरी मंदिर के सिंहद्वार की तीसरी सीढ़ी को लेकर एक खास मान्यता है।
क्या है कथा?
पुरानी कथा के अनुसार, एक बार यमराज स्वयं भगवान जगन्नाथ से मिलने पुरी आए। यमराज ने कहा —
“प्रभु! इस मंदिर में दर्शन करने के बाद कोई भी व्यक्ति यमलोक नहीं आता क्योंकि उसके सारे पाप धुल जाते हैं।”
यह सुनकर भगवान जगन्नाथ मुस्कुरा उठे और बोले —
“यदि ऐसा है तो मंदिर की तीसरी सीढ़ी को तुम्हारा स्थान माना जाए।”
तभी से मान्यता है कि भगवान के दर्शन के बाद यदि कोई व्यक्ति तीसरी सीढ़ी पर पैर रखता है, तो उसके पाप तो मिट जाते हैं, लेकिन उसे यमलोक का रास्ता अवश्य देखना पड़ता है। इसलिए इस सीढ़ी को यम शिला कहा जाता है और भक्त उस पर पैर रखने से बचते हैं।

2. हनुमान जी को क्यों बांधा गया?
पुरी मंदिर से ही जुड़ा है बंदी हनुमान मंदिर (Bedi Hanuman Temple) का रहस्य।
क्या है कथा?
एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय समुद्र देवता को भगवान जगन्नाथ के दर्शन की तीव्र इच्छा हुई। वे मंदिर में प्रवेश कर गए, जिससे मंदिर और भक्तों को नुकसान पहुंचने लगा।
तब भगवान जगन्नाथ ने पुरी धाम की रक्षा का दायित्व हनुमान जी को सौंपा। और वो दिन – रात मंदिर की पहरेदारी करने लगे लेकिन एक दिन समुद्र मंदिर में प्रवेश करने आया तो हनुमान जी ने समुद्र को मंदिर में घुसने से रोक दिया। लेकिन समुद्र ने हनुमान जी को बहलाने की कोशिश की और पूछा –
“क्या आपको मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन की इच्छा नहीं होती?”
इस बात को सुनकर हनुमान जी के मंदिर में दर्शन के लिए अंदर जाने लगे लेकिन समुद्र भी उनके पीछे जाने लगा। इसलिए भगवान जगन्नाथ ने उन्हें जंजीरों से बांध दिया, ताकि वे अपने स्थान पर ही रहें और समुद्र को मंदिर में घुसने से रोक सकें। यही वजह है कि आज भी पुरी में हनुमान जी की प्रतिमा को जंजीरों में बांधकर रखा जाता है।

3. मंदिर के ऊपर पक्षियों का न उड़ना…
पुरी के जगन्नाथ मंदिर की सबसे रहस्यमय बात यह है कि मंदिर की ऊंचाई पर कोई पक्षी या विमान नहीं उड़ता।
मान्यता है कि, पक्षी मंदिर के ऊपर पहुंचते ही वापस लौट जाते हैं। कुछ वैज्ञानिक इसे वायुप्रवाह, चुंबकीय क्षेत्र या वास्तुशास्त्र से जोड़कर समझाते हैं। लेकिन भक्त इसे भगवान जगन्नाथ की दैवीय लीला मानते हैं।
4. लहरों की आवाज मंदिर में क्यों नहीं सुनाई देती?
पुरी समुद्र के किनारे स्थित है। सिंहद्वार (मुख्य द्वार) पर खड़े होकर समुद्र की लहरों की आवाज तेज़ सुनाई देती है। मगर जैसे ही आप मंदिर के अंदर प्रवेश करते हैं, लहरों की आवाज अचानक बंद हो जाती है।
यह कोई भ्रम नहीं बल्कि सच्चाई है, जो हर किसी के साथ होती है। आज तक कोई यह नहीं समझ पाया कि मंदिर में कदम रखते ही लहरों की आवाज कैसे गायब हो जाती है।

5. हवा के विपरीत झंडा और 18 साल का डर..
मंदिर के शिखर पर लहराता ध्वज (झंडा) हमेशा हवा की विपरीत दिशा में फहराता है, जबकि सामान्यतः झंडे हवा के साथ लहराते हैं।
एक और मान्यता कहती है –
‘यदि किसी दिन मंदिर का झंडा नहीं बदला गया, तो मंदिर 18 साल के लिए बंद हो जाएगा। माना जाता है कि पुराना झंडा नकारात्मक ऊर्जा खींच लेता है, इसलिए रोज ध्वज बदलना अनिवार्य होता है।’
6. भगवान जगन्नाथ का धड़कता हुआ हृदय…
पुरी जगन्नाथ मंदिर की सबसे बड़ी रहस्यमय मान्यता है — भगवान का धड़कता हुआ हृदय।
कहा जाता है कि, जब श्रीकृष्ण ने पृथ्वी पर देह का त्याग किया, उनका शरीर पांच तत्वों में विलीन हो गया। लेकिन उनका हृदय बचा रहा। यही हृदय आज भी जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर सुरक्षित है और धीरे-धीरे धड़कता है। हर 12 साल में भगवान की मूर्तियां बदली जाती हैं, लेकिन मूर्ति के भीतर रखा यह रहस्यमयी तत्व कभी नहीं बदला जाता।
7. जगन्नाथ मंदिर की रसोई का रहस्य…
पुरी का जगन्नाथ मंदिर दुनिया की सबसे बड़ी रसोई के लिए मशहूर है। बताया जाता है कि, यहां रोजाना लाखों भक्तों के लिए प्रसाद तैयार होता है। प्रसाद सात मिट्टी के बर्तनों में एक के ऊपर एक रखकर पकाया जाता है। चमत्कार यह है कि सबसे ऊपर रखा बर्तन पहले पकता है, फिर नीचे वाले, और आखिर में सबसे नीचे का बर्तन पकता है। यह विज्ञान के नियमों के उलट है और आज तक इसका रहस्य कोई नहीं सुलझा पाया है।
8. सुदर्शन चक्र और अदृश्य छाया का रहस्य…
मंदिर के शिखर पर स्थित नीलचक्र (सुदर्शन चक्र) को किसी भी दिशा से देखें, वह हमेशा ऐसा प्रतीत होता है जैसे आपकी ओर ही देख रहा हो।
इसी तरह, एक और अद्भुत तथ्य है कि मंदिर की छाया जमीन पर कभी दिखाई नहीं देती। इतनी ऊँचाई के बावजूद मंदिर की छाया का अदृश्य रहना वैज्ञानिकों को भी हैरान कर देता है।

पुरी रथ यात्रा का महत्व…
हर साल आषाढ़ महीने की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर विशाल रथ यात्रा निकाली जाती है।
इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अलग-अलग रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं।
यह परंपरा हजारों वर्षों से चल रही है और करोड़ों श्रद्धालु इसका साक्षी बनने पुरी पहुंचते हैं।

