सड़क पर गुलदार
सूचना मिलते ही मसूरी वन प्रभाग की टीम, रेंजर और कर्मचारियों के साथ, तत्काल मौके पर पहुंची। डीएफओ अमित कुंवर ने बताया कि गुलदार का बच्चा पहाड़ी ढलान पर इधर-उधर भटक रहा था और संभवतः अपनी मां से बिछड़ गया था। बच्चा किसी भी समय झाड़ियों में गायब हो सकता था, जिससे उसका पीछा करना मुश्किल हो जाता। वन विभाग ने स्थानीय लोगों के सहयोग से इलाके की घेराबंदी की ताकि गुलदार का बच्चा जंगल की ओर भागने के बजाय सुरक्षित पकड़ा जा सके। लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद, बच्चे को सुरक्षित काबू में ले लिया गया।

वन विभाग ने किया रेस्क्यू
रेस्क्यू के तुरंत बाद गुलदार के बच्चे को मसूरी वन विभाग के कार्यालय लाया गया। यहां पशु चिकित्सक ने उसका प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि बच्चा स्वस्थ है, लेकिन एहतियात के तौर पर उसे हरिद्वार के चीला रेस्क्यू सेंटर भेजा गया। वहां विशेषज्ञ पशु चिकित्सक उसकी विस्तृत जांच करेंगे। डीएफओ अमित कुंवर ने बताया कि यदि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ पाया जाता है, तो उसे उसी जंगल में वापस छोड़ दिया जाएग।
Leopard Cub Rescue Mussoorie: मां की तलाश
डीएफओ ने बताया कि गुलदार की मां संभवतः आसपास के जंगल में अपने बच्चे की तलाश में घूम रही होगी। यदि बच्चे को जल्द जंगल में नहीं छोड़ा गया, तो मां मानव बस्तियों में घुस सकती है, जिससे खतरा बढ़ सकता है। इसीलिए, बच्चे को जल्द से जल्द उसके प्राकृतिक आवास में लौटाने की योजना है। वन विभाग ने इस बात पर जोर दिया कि गुलदार जैसे जंगली जानवर आमतौर पर तब तक आक्रामक नहीं होते, जब तक उन्हें उकसाया न जाए।
वन विभाग की जनता से अपील
वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि जंगली जानवरों को देखकर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत नजदीकी वन कार्यालय या हेल्पलाइन को सूचित करें। यह घटना मसूरी जैसे जंगल से सटे क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की संवेदनशीलता को दर्शाती है। विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और जंगली जानवरों के साथ दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।
सुनील सोनकर की रिपोर्ट
