जब आसमान से सिर्फ पानी नहीं, तबाही बरसती है
कुछ बारिशें वो होती हैं जो चाय और पकौड़े के लिए मौसम बना देती हैं। और कुछ वो, जो ज़िंदगी ही उलट देती हैं। मुंबई में बीती रात से जो बारिश हो रही है, वो दूसरी वाली बारिश है कड़वी, डरावनी और जानलेवा।

विक्रोली के एक छोटे से इलाके में, रात के अंधेरे में एक पहाड़ खिसक गया। लैंडस्लाइड। दो लोगों की ज़िंदगी वहीं रुक गई, जैसे बारिश ने उनकी साँसे भी अपने साथ बहा दी हों। दो लोग ज़ख्मी हैं, जो अस्पताल में ज़िंदगी से लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन इस लड़ाई की शुरुआत तो बारिश ने की थी, है ना?
मुंबई: शहर जो कभी सोता नहीं, आज थम सा गया है
यह वही मुंबई है, जहां लोग पानी में घुटनों तक डूबे हों, फिर भी ऑफिस के लिए निकल पड़ते हैं। लेकिन आज माहौल कुछ और है।
सायन, वाशी, नवी मुंबई जैसे इलाकों में 4 फीट तक पानी भर चुका है। रेलवे ट्रैक डूब गए हैं। लोकल ट्रेनें जो मुंबई की धड़कन हैं अब रुक-रुक कर सांस ले रही हैं।
सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हुई एक आदमी अपने सामान को हाथगाड़ी पर रखकर पानी से बचाने की कोशिश कर रहा है। चेहरे पर चिंता, लेकिन हाथों में हिम्मत। शायद यही मुंबई है टूटती नहीं, मगर थक ज़रूर जाती है।
भागलपुर, बिहार: जहां लोग राहत की आस में डूबे हैं
जब आप मुंबई की तस्वीरों से निकलते हैं, तो एक और खबर दिल दहला देती है बिहार के भागलपुर में 6 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
गंगा और कोसी उफान पर हैं। फरक्का बैराज के सभी 109 गेट खोलने पड़े। अब ज़रा सोचिए जिन घरों में अब तक सिर्फ गरीबी थी, वहां अब पानी भी घुस आया है। खेत डूबे हैं, स्कूल बंद हैं, और लोग छतों पर सर्द रातें काट रहे हैं। और ये सब उस राज्य में हो रहा है जहां इस सीजन में जितनी बारिश होनी चाहिए थी, उससे 155mm कम बारिश हुई है। यानी कहीं पानी बहुत ज़्यादा, और कहीं बहुत कम। कुदरत का ये संतुलन कैसे बिखर गया?
देशभर में मौसम की मार
दिल्ली में हुमायूं के मकबरे के एक कमरे की छत गिर गई। 6 लोगों की जान चली गई। उत्तराखंड में एक कपल गंगा की सहायक नदी चंद्रभागा में बह गया। राजस्थान में तो 69 साल का रिकॉर्ड ही टूट गया जितनी बारिश पूरे मानसून में होती है, उतनी डेढ़ महीने में हो चुकी है। हर दिशा से एक ही खबर आ रही है: बारिश, और उसके पीछे छुपा हुआ खौफ।
प्रशासन की अपील
सरकारें अलर्ट जारी कर रही हैं रेड, ऑरेंज, यलो। पर सवाल ये है कि क्या अलर्ट किसी मां के बच्चे को बचा सकता है जो लैंडस्लाइड में दब गया? क्या एक येलो अलर्ट किसी किसान की फसल को बचा पाएगा जो कोसी में बह गई? सरकारी भाषा में ये “आपदा प्रबंधन” है, लेकिन असल ज़िंदगी में ये संघर्ष और धैर्य की परीक्षा है।

पानी की मार से ज़्यादा, लापरवाही की चोट
बारिश आना बुरा नहीं है। लेकिन जब हम नालों की सफाई नहीं करते, जमीन का अंधाधुंध दोहन करते हैं, और जल निकासी की प्लानिंग को नजरअंदाज करते हैं तब ये बारिश सिर्फ पानी नहीं लाती, तबाही का चेहरा बन जाती है। हर साल हम यही पढ़ते हैं, सुनते हैं, और शायद अगले साल फिर यही होगा। लेकिन एक सवाल ज़रूर उठता है क्या इस बार हम कुछ सीखेंगे? या फिर अगली बारिश भी किसी की आखिरी साँस ले जाएगी?
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