राजधानी की सुरक्षा
यह डिफेंस सिस्टम QRSAM, VSHORADS और डायरेक्ट एनर्जी वेपन जैसी तकनीकों से लैस है। ये मिसाइल, ड्रोन और फाइटर जेट्स जैसे हवाई खतरों से राजधानी की सुरक्षित रखेगा। अमेरिका के NASAMS-II सिस्टम की महंगी डील को खारिज कर भारत ने पूरी तरह स्वदेशी समाधान अपनाया है। IADWS के संचालन की कमान इंडियन एयरफोर्स के हाथ में रहेगी, और इसे 2035 तक पूरी तरह ऑपरेशनल होने की योजना है।


Multi-Layered Air Defense System Delhi: हमलों के बाद लिया फैसला
दिल्ली-NCR को मिसाइल, ड्रोन और जेट जैसे हवाई खतरों से बचाने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम तैयार किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं, अगर दुश्मन पहली परत पार भी कर गया, तो अगली परत उसे रोक देगी। इस सिस्टम में क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल, वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस और दिल्ली-NCR की सुरक्षा के लिए कई और देसी इक्विपमेंट शामिल होंगे। दिल्ली में हुए हमले और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिल्ली को निशाना बनाने के बाद दिल्ली को सेफ रखने के लिए ये फैसला लिया गया था।
ड्रोन अटैक के खिलाफ रक्षा कवच
Multi-Layered Air Defense System Delhi: IADWS सुदर्शन चक्र मिशन का एक हिस्सा माना जा रहा है। यह स्वॉर्म (एक साथ छोड़े गए कई ड्रोन्स) ड्रोन अटैक के खिलाफ रक्षा कवच बनेगा। PM मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने भाषण में सुदर्शन चक्र मिशन की घोषणा की थी। इसके बाद 23 अगस्त को ओडिशा में IADWS का सफल परीक्षण किया गया था।
भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम का पहला सफल परीक्षणः हर चुनौती का होगा मुंह तोड़ जवाब!
23 अगस्त को भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर एक ऐतिहासिक परीक्षण किया। यह परीक्षण भारत के मल्टीलेयर एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (IADWS) का पहला परीक्षण था, जो आने वाले समय में देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपने भाषण में सुदर्शन चक्र मिशन की घोषणा की थी, और यह परीक्षण उसी मिशन का हिस्सा है। यह प्रणाली अब केवल एक परंपरागत एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है, बल्कि यह नए दौर के युद्ध, खासकर ड्रोन युद्ध, के लिए एक ताकतवर कवच बनकर उभरी है। पूरी खबर…
