MP wheat purchase: मध्य प्रदेश में किसानों के लिए राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को साफ किया है कि प्रदेश में गेहूं की खरीदी तय समय पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर शुरू की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ खड़ी है और उनकी उपज का पूरा मूल्य सुनिश्चित करेगी।
रविवार को भोपाल स्थित समत्व भवन में गेहूं उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खरीदी प्रक्रिया में पहले छोटे किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी, उसके बाद मध्यम और बड़े किसानों से खरीद होगी।

बारदाने की नहीं होगी कोई कमी
सीएम डॉ यादव ने कहा कि गेहूं खरीदी के लिए प्रदेश में बारदाने की कोई कमी नहीं है। राज्य सरकार केंद्र सरकार, जूट कमिश्नर और अन्य एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में किसानों को बारदाने की समस्या का सामना न करना पड़े।
तौल केंद्रों का समय से निरीक्षण जरूरी
मुख्यमंत्री ने उपार्जन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि सभी तौल केंद्रों का 10 अप्रैल से पहले निरीक्षण किया जाए। उन्होंने राज्य स्तर और मंडी स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश भी दिए, ताकि पूरी प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी जा सके।

किसानों के लिए बेहतर सुविधाओं पर जोर
सीएम डॉ यादव ने कहा कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए बिजली, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, छाया, शौचालय और पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि किसानों को लंबी कतारों में इंतजार न करना पड़े और गेहूं तौलने की प्रक्रिया सुचारू रूप से चले। साथ ही, खरीदी के बाद किसानों के खातों में समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

MSP और बोनस का मिलेगा लाभ
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल से तथा अन्य संभागों में 15 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होगी। इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, साथ ही राज्य सरकार 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी देगी। इस उपार्जन वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश में 19 लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है। गेहूं खरीदी के लिए 3,627 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं और करीब 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का अनुमान है। सरकार ने आश्वस्त किया है कि सभी व्यवस्थाएं पूरी हैं और किसानों को बिना किसी परेशानी के उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा।
