mp vulture census: मध्यप्रदेश के जंगलों से एक अच्छी खबर सामने आई है. राज्य में गिद्धों की संख्या लगातार बढ़ रही है और ताजा गणना के शुरुआती रुझान बता रहे हैं कि इस बार आंकड़ा 14 हजार के पार जा सकता है.फरवरी-मार्च में हुई गिद्ध गणना के पहले चरण के बाद वन विभाग को जो आंकड़े मिले हैं, उनसे संकेत मिल रहे हैं कि मध्यप्रदेश अब देश में गिद्ध संरक्षण का बड़ा केंद्र बन सकता है। हालांकि अंतिम और आधिकारिक आंकड़े दूसरे चरण की गिनती के बाद ही सामने आएंगे।
mp vulture census: दूसरे चरण की गिनती अप्रैल-मई में
वन विभाग के अनुसार गिद्धों की गणना का पहला चरण 20 से 22 फरवरी के बीच तीन दिन तक चला। इसमें प्रदेश के कई अभयारण्यों और जंगल क्षेत्रों में सर्वे किया गया.पहले चरण में गिद्धों की संख्या 14 हजार के पार पहुंचती दिख रही है, लेकिन अभी इन आंकड़ों को आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है.अब दूसरा चरण अप्रैल या मई में होगा, जिसमें गिद्धों की प्रजनन गतिविधियों और दीर्घकालिक जनसंख्या रुझानों का फिर से आकलन किया जाएगा। इसके बाद ही अंतिम आंकड़े घोषित किए जाएंगे।
mp vulture census: गिद्धों की संख्या लगातार बढ़ रही
अब तक के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं—
2016: 7028 गिद्ध
2019: 8,397
2021: 9,446
2024: 10,845
2025: 12,981
प्रदेश में कुल 7 प्रजातियों के गिद्ध पाए जाते हैं। इनमें 4 स्थानीय और 3 प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं। प्रमुख प्रजातियों में भारतीय गिद्ध, सिनेरियस गिद्ध, मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजर) और हिमालयन ग्रिफॉन शामिल हैं।
रायसेन में सबसे ज्यादा गिद्ध
पहले चरण की गणना में प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं.सबसे ज्यादा गिद्ध रायसेन जिले में पाए गए हैं। वहीं कई संरक्षित क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या दर्ज की गई है।
रायसेन – 1532
पन्ना (पवई रेंज) – 1127
गांधी सागर – 1084
शिवपुरी – 735
रीवा – 622
अनूपपुर – 413
बांधवगढ़ – 276
कान्हा – 224
गौरतलब है कि गणना के दौरान केवल बैठे हुए गिद्धों को ही गिना जाता है, उड़ते हुए गिद्धों को आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाता।
पन्ना और वन विहार में भी दिखीं खास प्रजातियां
हालिया सर्वे में पन्ना क्षेत्र में लाल सिर वाले गिद्ध और भोपाल के वन विहार क्षेत्र में सफेद पीठ वाले गिद्ध देखे जाने की भी जानकारी सामने आई है.इसके अलावा पन्ना, रायसेन के हलाली डैम, शिवपुरी और मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य में गिद्धों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
GPS ट्रैकर से हो रही निगरानी
हाल ही में 23 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के पांच गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा था.इन गिद्धों पर हाई-टेक GPS ट्रैकर लगाए गए हैं, ताकि वन विभाग उनकी गतिविधियों और आवागमन की निगरानी कर सके.वन अधिकारियों का मानना है कि अगर संरक्षण के प्रयास इसी तरह जारी रहे तो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश गिद्धों के लिए देश का सबसे बड़ा सुरक्षित आवास बन सकता है।
