MP Vantara: मध्यप्रदेश को वन्य पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान दिलाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में विश्वस्तरीय वन्य जीव केन्द्र विकसित करने के संकेत दिए हैं, जिसे ‘वनतारा’ की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। सरकार का फोकस है कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ चिड़ियाघर न रहे, बल्कि सफारी एक्सपीरियंस के साथ एक पूरा फॉरेस्ट टूरिज्म डेस्टिनेशन बने।

उज्जैन और जबलपुर में बनेंगे 2 वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर
सीएम हाउस में हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन और जबलपुर में अत्याधुनिक वन्य जीव केन्द्र सह रेस्क्यू सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। दोनों परियोजनाओं के लिए कंसल्टेंट फर्म की नियुक्ति हो चुकी है और अब डिजाइन से लेकर निर्माण तक की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश में खासकर वन्य पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी।
“वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को नया आयाम”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भोपाल स्थित निवास पर उज्जैन वन्यजीव केंद्र के निर्माण को लेकर कंसल्टेंट फर्म के साथ समीक्षा बैठक।@DrMohanYadav51 @minforestmp #CMMadhyaPradesh pic.twitter.com/jRmgzzTVWV
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) February 6, 2026
2026 में शुरू होगा फेज-1 का काम
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 में उज्जैन वन्य जीव केन्द्र के फेज-1 का निर्माण कार्य शुरू हो जाना चाहिए। लक्ष्य है कि जितनी जल्दी हो सके यह सेंटर तैयार हो, ताकि उज्जैन को एक बेहतरीन फॉरेस्ट टूरिज्म स्पॉट के रूप में स्थापित किया जा सके।
500 हैक्टेयर में तैयार होगा ‘जंगल जू सफारी’
उज्जैन में प्रस्तावित वन्य जीव केन्द्र करीब 500 हैक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसमें 50 हैक्टेयर में पहले से मौजूद ईको टूरिज्म पार्क को भी शामिल किया जाएगा। सीएम ने निर्देश दिए कि यह केन्द्र ऐसा हो, जहां देश और दुनिया के अलग-अलग जंगलों का अनुभव एक ही जगह मिल सके। वन एवं वन्य प्राणियों की विविधता इसे देश के अन्य सेंटरों से अलग पहचान देगी।
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MP Vantara: दिन के साथ रात की सफारी का भी अनुभव
योजना के मुताबिक, उज्जैन के इस वन्य जीव केन्द्र में पर्यटक दिन और रात दोनों समय सफारी का आनंद ले सकेंगे। डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया में इस बात का खास ध्यान रखा जा रहा है कि अनुभव रोमांचक होने के साथ सुरक्षित भी रहे।
कंसल्टेंट फर्म की प्रेजेंटेशन में बताया गया कि इस सेंटर में देश-दुनिया के 11 अलग-अलग जंगलों की थीम पर ज़ोन तैयार किए जाएंगे। यहां 300 से अधिक देशी और विदेशी प्रजातियों के जंगली जानवर होंगे, जिनमें करीब 75 प्रतिशत देशी और 25 प्रतिशत विदेशी प्रजातियां शामिल रहेंगी।
छह चरणों में पूरा होगा निर्माण
वन्य जीव केन्द्र का निर्माण कुल छह चरणों में किया जाएगा। 2026 में पहला चरण (सेंटर फॉर्मेशन) शुरू होगा और 2027 के अंत तक फेज-1 पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है यहां ‘इनविज़िबल फेंसिंग’ वाला ओपन जंगल भी होगा, जहां पर्यटक पैदल, बग्घी, सफारी और सेवा वाहनों से भ्रमण कर सकेंगे। साथ ही एक अत्याधुनिक रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा।
‘असली जंगल-चिड़ियाघर सफारी’ का दावा
कंसल्टेंट फर्म का दावा है कि उज्जैन में विकसित होने वाला यह वन्य जीव केन्द्र दुनिया में पहली बार असली ‘जंगल-चिड़ियाघर सफारी’ का अनुभव देगा। यानी जानवर प्राकृतिक माहौल में होंगे और इंसान तय रास्तों से उनका दीदार करेगा।
