Bhopal: मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा पिछले कई सत्रों से सुस्ती और अनियमितताओं की मार झेल रही है। सत्र 2023‑24 में विभागीय खामियों के कारण कई कॉलेजों को जीरो ईयर घोषित करना पड़ा था, वहीं 2024‑25 में कुल सीटों का केवल एक छोटा हिस्सा ही भरा जा सका था। अब उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद नर्सिंग काउंसिल ने पोस्ट बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग दोनों पाठ्यक्रमों के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे हजारों विद्यार्थियों को प्रवेश का मौका मिलने की उम्मीद जगी है।
Bhopal: लापरवाही से जीरो ईयर किया था घोषित
नर्सिंग शिक्षा हर साल सुर्खियों में रहती है, पर अच्छे कारण से नहीं। वर्ष 2023‑24 में चिकित्सा शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते नर्सिंग पाठ्यक्रमों को समय रहते संचालित नहीं किया जा सका और कई कॉलेजों के शैक्षिक सत्र को “जीरो ईयर” घोषित करना पड़ा। इसके बाद 2024‑25 में सिर्फ 25‑30 प्रतिशत सीटें ही भरी जा सकीं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों का मनोबल दोनों प्रभावित हुए।
Bhopal: सुनवाई में देरी पर आपत्ति
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने नर्सिंग काउंसलिंग में निरंतर हो रही देरी और प्रशासन की अलसाई व्यवस्था को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। परमार ने कहा कि केवल कुछ ही कॉलेजों में छात्रों के प्रवेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अधिकांश सीटें वाकई खाली पड़ी हैं और विद्यार्थियों को अवसर नहीं मिल पा रहा है।
निजी कॉलेजों का आंकड़ा चिंताजनक
परमार के हवाले से यह भी बताया गया कि शासकीय कॉलेजों में 400 सीटों में से केवल 334 ही भरी जा सकीं, जबकि 66 सीटें खाली रहीं। निजी कॉलेजों की बात करें तो 3376 सीटों में से सिर्फ 350 सीटों पर प्रवेश हुआ, और बाकी 3018 सीटें खाली पड़ी रहीं। यह साफ संकेत है कि जगह‑जगह भराती व्यवस्था व जानकारी में कमी छात्रों को परेशान कर रही थी।
एमएससी नर्सिंग में भी सीटें रही अधूरी
एमएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। शासकीय कॉलेजों में 405 सीटों में से 335 पर ही प्रवेश संभव हुआ और 70 सीटें बिना भरें रह गईं। निजी कॉलेजों में 1551 सीटों में सिर्फ 431 ही студентों ने प्रवेश लिया, जबकि 1120 सीटें रिक्त रहीं। पिछली तीन सत्रों के इन आंकड़ों से यह जाहिर होता है कि कुल मिलाकर मात्र लगभग 25 प्रतिशत सीटें ही भरी जा सकीं, और लगभग 75 प्रतिशत सीटें रिक्त पड़ी रहीं।
अब ये उम्मीद
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद नर्सिंग काउंसिल ने काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि 2025‑26 सत्र में छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे और खाली सीटों का आंकड़ा घटेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर जागरूकता, सलाह, और प्रशासनिक समर्थन मिल सके तो नर्सिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में छात्रों की रुचि व प्रवेश बढ़ सकता है।
