जाने क्या है सदियों से चली आ रही अनूठी परम्परा

MP NEWS: दीपावली के दूसरे दिन के बाद से मोनिया नृत्य शुरू होता है, मोनिया नृत्य बुंदेलखंड का एक प्राचीन लोक नृत्य है, यह नृत्य दीपावली के दूसरे दिन किया जाता है इस नृत्य में पुरुष मोर के पंखों को लेकर घेरा बनाते हैं और नृत्य करते हैं, मोनिया नृत्य को दीपावली नृत्य भी कहा जाता है, इस नृत्य की धूम बुंदेलखंड के लगभग सभी जिलों में रहती है
MP NEWS: मोनिया नृत्य की धूम

निवाड़ी जिले के प्रसिद्ध पर्यटन व तीर्थ स्थल ओरछा की, जहां पर स्थित भगवान श्रीराम राजा के मंदिर पर आज ग्वालो के रूप में पहुंची मौनिया नृत्य की टोलिया डोल और नगड़िया की थाप पर जमकर नाची, दरअसल दीपावली के दूसरे आज कृष्ण भक्त के ग्वाल रूप में ग्रामीण क्षेत्रों से मौन धारण कर गांव-गांव से निकली यह टोलिया तीर्थ स्थलों पर पहुंचकर भगवान की पूजा अर्चना करने के बाद जमकर नाचते है, कमर में घुंघरू बांध, हाथ में मोरपंख लेकर ढोल-नगड़िया की थाप और मजीरा की ताल पर मौनिया थिरक रहे हैं,
MP NEWS: संस्कृति का अद्भुत संगम

दिनभर यहां लोक कला और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, इसके पश्चात मोनिया नर्तको का यह दल गांव-गांव नाचते गाते घूमते हुये देर शाम तक अपने गांव पहुंचते है, हाथ में लाठी और मोर पंख लिए सजी धजी मोनिया नर्तकों का नृत्य देखते ही बनता है, बुन्देलखण्ड के लोकनृत्य मोनिया के बारे इतिहासकार हेमंत गोस्वामी ने बताया की मोनिया लोकनृत्य खासतौर पर बुन्देलखण्ड का एक लोकनृत्य है मोनिया नृत्य दीपावली के दूसरे दिन प्रस्तुत किया जाता है,
MP NEWS: सिर्फ पुरुष ही लेते है भाग

बुंदेलखंड में मनाया जाने वाला मोनिया नृत्य पुरुष प्रधान है इसमें मात्र पुरुष ही भाग लेते है, इस नृत्य का केंद्र वीर रस प्रधान होता है।
