MP milk adulteration: मध्यप्रदेश में दूध और उससे बने उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। हालिया नमूना परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लगभग 13 प्रतिशत दूध के सैंपल अमानक पाए गए हैं।पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह प्रतिशत 13 से 16 फीसदी के बीच बना हुआ है, जो खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है।
MP milk adulteration: जांच में सामने आई सच्चाई
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अमानक पाए गए दूध में पानी के अलावा पाम ऑयल, सिंथेटिक पदार्थ और अन्य हानिकारक रसायनों की मिलावट पाई गई है।विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मिलावटी उत्पाद लंबे समय तक सेवन करने पर स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं।
MP milk adulteration: इन इलाकों में ज्यादा मिलावट
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जिन क्षेत्रों में दूधारू पशुओं की कमी है, वहां मिलावट के मामले ज्यादा पाए गए हैं। मांग और आपूर्ति के अंतर को पूरा करने के लिए मिलावट का सहारा लिया जा रहा है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़ा
- 2024-25: 7091 नमूनों में से 924 अमानक (करीब 13%)
- 2023-24: करीब 14.44% नमूने अमानक
- 2022-23: 16.73% तक मिलावट के मामले
इन आंकड़ों से साफ है कि मिलावट में कुछ कमी आई है, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है।
कार्रवाई के बावजूद कंट्रोल नहीं
राज्य में मिलावटी डेयरी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। “मिल्क मैजिक” ब्रांड के तहत पाम ऑयल और अन्य रसायनों से बने उत्पादों के निर्माण और निर्यात के मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने भी ऐसे कारोबारियों पर शिकंजा कसा है। खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, त्योहारों के दौरान चलाए गए विशेष अभियान और सघन जांच के चलते मिलावट के मामलों में कुछ कमी आई है। अधिकारियों का कहना है कि दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी और सैंपलिंग अभियान चलाए जा रहे हैं।
