MP Excise officials suspended: मध्य प्रदेश में शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में लापरवाही पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। राजस्व लक्ष्य में पिछड़ने और नीलामी प्रक्रिया समय पर पूरी न होने पर बैतूल और गुना के आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है और स्पष्ट संकेत दिया है कि अब किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।

दो अधिकारियों पर गिरी गाज, नीलामी में सुस्ती बनी वजह
आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने बैतूल के जिला आबकारी अधिकारी अंशुमान सिंह चिड़ार और अशोकनगर-गुना के प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी गुरुप्रसाद केवट को निलंबित कर दिया है। दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने शराब दुकानों की नीलामी में अपेक्षित तेजी और प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे राजस्व हित प्रभावित हुआ। इस आधार पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम, 1966 के तहत यह कार्रवाई की गई।
भोपाल और ग्वालियर में किया गया अटैच
निलंबन के बाद दोनों अधिकारियों का मुख्यालय संभागीय कार्यालयों में निर्धारित किया गया है। बैतूल के अधिकारी को भोपाल स्थित उड़नदस्ता कार्यालय और गुना के अधिकारी को ग्वालियर संभागीय कार्यालय से अटैच किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

400 शराब दुकानों की नीलामी अब भी बाकी
आबकारी विभाग के अनुसार, प्रदेश में वर्ष 2026-27 की नीति के तहत कुल 3553 शराब दुकानों में से अब तक 3153 की नीलामी पूरी हो चुकी है, जबकि 400 दुकानें अभी भी शेष हैं। इन दुकानों के संचालन के लिए विभाग को फिलहाल अपने स्तर पर व्यवस्था करनी पड़ रही है, जिससे प्रशासनिक दबाव बढ़ गया है।
राजस्व लक्ष्य पर असर, विभाग सख्त
शेष 400 दुकानों का आरक्षित मूल्य 3261 करोड़ रुपए है, जबकि इनके लिए अब तक 1529 करोड़ रुपए के ऑफर मिले हैं। इस वर्ष कुल आरक्षित मूल्य 19952 करोड़ रुपए रखा गया है, जो पिछले वर्ष के 16627 करोड़ रुपए से लगभग 20% अधिक है। 6 अप्रैल तक कुल 16848 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हो चुका है।
कॉन्ट्रैक्टरों की संख्या में बढ़ोतरी
इस साल नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने वाले कॉन्ट्रैक्टरों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष जहां 489 ठेकेदार थे, वहीं इस बार यह संख्या बढ़कर 919 हो गई है, जो बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि राजस्व लक्ष्य की पूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए आगे भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
