MP Crime update: मध्य प्रदेश को शांति का टापू कहा जाता है। बीते कुछ दिनों से अलग-अलग शहरों में कारोबारियों से रंगदारी की मांग की जा रही है। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले की जांच के लिए SIT गठित कर दी है।

MP में बढ़ती रंगदारी और संगठित अपराध की घटनाओं के बीच बड़ा खुलासा सामने आया है। पुलिस जांच में सामने आया कि कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े ऑपरेटिव सरकारी पोर्टलों और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे है। और अमीर कारोबारियों को निशाना बना रहे हैं। इसी के मद्देनजर राज्य पुलिस मुख्यालय ने अशोकनगर, इंदौर, खरगोन और भोपाल समेत कई जिलों के मामलों की जांच के लिए एसटीएफ के तहत एसआईटी का गठन किया है।
MP Crime update: अमीर लोगों से मांगी जा रही है रकम
बता दें की इंदौर महू खरगोन में अमीर लोगों को कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े गैंगस्टर ने धमकी देकर फिरौती की मांग की। अशोक नगर पुलिस ने इस मामले में अबसे पहले सफलता प्राप्त की और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर अहम सुराग हासिल किए। गैंगस्टर द्वारा टारगेट के सिलेक्शन से लेकर उन्हें आतंकित करने की प्रोसेस विभिन्न चरणों में संपादित होती है। इसके सहित टारगेट को डिजिटल सबूतों के साथ बताया जाता है कि उसे धमकाने वाले लोग कौन हैं। विभिन्न घटनाओं में 1 जैसा ही पैटर्न सामने आ रहा है लेकिन हो सकता है कि अलग-अलग गैंग भी एक ही पैटर्न को फॉलो कर रहे हो।
MP Crime update: सरकारी पोर्टलों से ले रहे जानकारी
बता दें की गैंग के सदस्य जीएसटी और रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) जैसे पोर्टलों से कारोबार, प्रोजेक्ट और टर्नओवर की विस्तृत जानकारी जुटाकर संभावित टारगेट तय करते हैं। हालांकि यह बात भी सामने आई है कि टारगेट तय करने में रितिक बॉक्सर से जुड़ा गैंग जो मेहनत करता है, उसका प्रतिद्वंद्वी गिरोह भी देर सवेर इस टारगेट को ‘टारगेट’ करने लगता है।
पेट्रोल बम फेंकने की तैयारी में था मनीष जांगिड़
इसी कड़ी में जयपुर से गूगल मैप का प्रयोग कर अशोक नगर पहुंचे 19 वर्षीय मनीष जांगिड़ को 28 फरवरी को अशोकनगर में गिरफ्तार किया गया, जो एक कारोबारी के घर गोली चलाने में नाकाम रहने के बाद पेट्रोल बम फेंकने की तैयारी में था। 10वीं कक्षा का ड्रॉपआउट जांगिड़ इंस्टाग्राम के जरिए गैंग के संपर्क में आया था और उसे वॉइस और वीडियो कॉल के माध्यम से पेट्रोल बम बनाने तक की ट्रेनिंग दी गई थी। पुलिस ने उसके पास से अहम डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए हैं। उसे मोटरसाइकिल खरीदने हुआ अन्य कामों के लिए कियोस्क सेंटर के माध्यम से उसके खाते में राशि जमा की गई थी। हालांकि उसके पकड़े जाने पर उसकी जमानत या अन्य कानूनी राहत के लिए कोई सामने नहीं आया है।
पुलिस मुख्यालय ने एसआईटी गठित की
इन घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने एसटीएफ के पर्यवेक्षण में एसआईटी का गठन किया है। इस टीम का नेतृत्व डीआईजी राहुल कुमार लोढ़ा को सौंपा गया है, जबकि इसमें कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। एसआईटी को निर्देश दिए गए हैं कि वह तत्काल सभी संबंधित प्रकरणों की केस डायरी लेकर जांच शुरू करे और भोपाल स्थित मुख्यालय से समन्वित कार्रवाई करे।
