मध्यप्रदेश की सरकारी शिक्षण व्यवस्था को लेकर कैग की रिपोर्ट ने गंभीर तस्वीर सामने रख दी है. 2026 की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदेश भर में एक लाख से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं.रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षकों की सबसे ज्यादा कमी ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में है, जबकि शहरी इलाकों में कई जगह स्वीकृत पदों से ज्यादा शिक्षक पदस्थ पाए गए।
हजारों स्कूल ऐसे, जहां एक भी शिक्षक नहीं
कैग की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। वहीं 435 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें नामांकन शून्य है.इसके अलावा 29,116 स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी के चलते छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई स्कूलों में एक या दो शिक्षक ही पूरे स्कूल का काम संभाल रहे हैं.इसके उलट भोपाल, इंदौर समेत कुछ बड़े शहरों में शिक्षकों की संख्या स्वीकृत पदों से अधिक पाई गई। यह असंतुलन लंबे समय से बना हुआ है।
युक्तियुक्तकरण नहीं, इसलिए बिगड़ा संतुलन
कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जिला स्तर पर प्राथमिक शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण ठीक से नहीं किया गया। इसी वजह से कुछ जिलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हैं और कुछ जगहों पर भारी कमी बनी हुई है.वर्ष 2022 में 46 जिलों में प्राथमिक शिक्षकों के 1,72,336 स्वीकृत पद थे, जिनमें से 1,56,084 शिक्षक कार्यरत पाए गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार (RTE) के मानकों के अनुसार इन जिलों में 1,53,643 शिक्षकों की जरूरत थी, इसके बावजूद 2,441 प्राथमिक शिक्षक अतिरिक्त पाए गए।इसके बाद भी शिक्षकों का समायोजन करने के बजाय 7,429 नए शिक्षकों की भर्ती कर दी गई, जिससे असंतुलन और बढ़ गया।
ग्रामीण स्कूलों में हालात ज्यादा खराब
कैग के आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में 62,213 स्कूल हैं। यहां 2,81,887 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 1,98,175 शिक्षक कार्यरत हैं, यानी सिर्फ 70.30 प्रतिशत पद ही भरे हुए हैं.वहीं शहरी क्षेत्रों के 4,601 स्कूलों में 47,556 स्वीकृत पदों के मुकाबले 43,319 शिक्षक कार्यरत हैं, जो करीब 91 प्रतिशत है।
3000 शिक्षकों की भर्ती का परिणाम जारी
शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए सरकार लगातार भर्तियां कर रही है। इसी क्रम में 13,089 प्राथमिक शिक्षकों की चयन परीक्षा का परिणाम हाल ही में जारी किया गया है.सरकार का कहना है कि नए शैक्षणिक सत्र से पहले यानी जुलाई से चयनित शिक्षकों की पदस्थापना कर दी जाएगी, लेकिन कैग रिपोर्ट साफ इशारा कर रही है कि सिर्फ भर्ती से नहीं, सही वितरण से ही हालात सुधरेंगे।
