मध्यप्रदेश में अब बस में सफर करते समय यात्रियों को परिचालक (कंडक्टर) की सीट का भी किराया देना होगा। परिवहन विभाग ने मोटरयान नियम 1994 में बदलाव करते हुए परिचालक को टैक्स छूट सूची से बाहर कर दिया है। इसका मतलब है कि बस मालिकों को अब परिचालक की सीट के लिए भी टैक्स देना होगा, जिससे बस का किराया बढ़ सकता है।
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जाने क्या है नए नियम
नए नियमों के अनुसार डीलक्स वातानुकूलित बस में कम से कम 36 सीट, एक्सप्रेस बस में 46 सीट और साधारण बस में 51 सीट होनी चाहिए। पहले परिचालक की सीट टैक्स-फ्री होती थी, लेकिन अब यह सुविधा खत्म हो गई है।
यात्रियों की बसों में अब केवल निजी सामान और पार्सल ही ले जाने की अनुमति होगी। व्यापारिक माल का कुल भार बस के लगेज भार का 10% से ज्यादा नहीं हो सकता। नियम तोड़ने पर जुर्माना लगेगा और अतिरिक्त सामान उतारना होगा। व्यापारिक माल के लिए ई-वे बिल अनिवार्य होगा।
यात्रियों की शिकायतों के लिए नया पोर्टल शुरू किया जाएगा। राज्य सरकार हर साल बस किराया और माल भाड़ा की समीक्षा करेगी और उसके आधार पर किराया बढ़ाया या घटाया जाएगा।
पुराने नियमों में मप्र राज्य सड़क परिवहन निगम बसों का संचालन करता था। अब यह जिम्मेदारी राज्य परिवहन के पास होगी। बसों की बॉडी लोक सेवा यान उद्योग मानक या भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार बनाई जाएगी और बसें केवल GPS वाले रूट पर ही चलेंगी।
एंबुलेंस के लिए भी नए नियम
एंबुलेंस के लिए भी नए नियम लागू किए गए हैं। अब कोई भी एंबुलेंस GPS के बिना नहीं चल सकेगी। सार्वजनिक और निजी एंबुलेंस को टोल-फ्री नंबर 112 या अन्य सरकारी नंबर से जोड़ना होगा।
बदलाव सुरक्षा और सुविधा के लिए
इस बदलाव का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा बढ़ाना है, लेकिन इसके चलते बस किराया थोड़ा बढ़ सकता है। परिवहन विभाग का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता और बेहतर संचालन के लिए जरूरी है।
