mp bjp: मध्य प्रदेश में भले ही अभी कोई चुनावी सरगर्मी न हो, लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा संगठन के भीतर हलचल तेज है। अगले दो महीने के भीतर पार्टी में संगठनात्मक स्तर पर कई अहम फैसले होने जा रहे हैं। प्रदेश समितियों से लेकर मोर्चों की कार्यकारिणी और मंडल से बूथ तक संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी चल रही है।
mp bjp: प्रदेश समितियों से लेकर प्रकोष्ठों तक बनेगा ढांचा
सूत्रों के मुताबिक संगठन से जुड़े फैसलों को तेज़ी से लागू करने को लेकर प्रदेश स्तर पर बैठकों में सहमति बन चुकी है। खास बात यह है कि पार्टी एक बार फिर प्रकोष्ठों का गठन करने जा रही है और इनमें पदाधिकारियों की नियुक्ति होगी।प्रदेश में फिलहाल कोई बड़ा चुनाव नहीं है, ऐसे में भाजपा संगठनात्मक विस्तार पर पूरा फोकस कर रही है। प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा के बाद यह सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें मंडल अध्यक्षों, संभाग और जिला प्रभारियों की नियुक्तियां भी शामिल हैं।
mp bjp: मोर्चों की प्रदेश कार्यकारिणी कभी भी
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अल्पसंख्यक मोर्चा को छोड़कर सभी प्रमुख मोर्चों के अध्यक्ष पहले ही नियुक्त कर चुके हैं। इनमें महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा और अनुसूचित जनजाति मोर्चा शामिल हैं।इन सभी मोर्चों की प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा इसी महीने होने की संभावना है। इसे लेकर दो दिन पहले प्रदेश कार्यालय में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक भी हो चुकी है, जिसमें नामों पर मंथन हुआ।
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मार्च तक जिलों और मंडलों में संगठन पूरा
पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश जिलों की कार्यकारिणी पहले ही घोषित हो चुकी है। जो जिले बाकी हैं, वहां भी जल्द ही घोषणा की जाएगी। इसके साथ ही मंडल स्तर की कार्यकारिणी मार्च तक पूरी कर ली जाएगी.संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की योजना है। पार्टी पदाधिकारियों के मुताबिक पहले प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारियां तय होंगी, उसके बाद निचले स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों में तेजी आएगी।
निगम-मंडलों में पदाधिकारियों को नहीं मिलेगी प्राथमिकता
भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने साफ किया कि निगम-मंडल, प्राधिकरण और अन्य सरकारी उपक्रमों में नियुक्तियों का फैसला मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है। संगठन में पद पर बैठे नेताओं को सामान्य परिस्थितियों में इन संस्थानों में जगह नहीं दी जाएगी.बताया गया कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही किसी संगठन पदाधिकारी को निगम-मंडल या प्राधिकरण में जिम्मेदारी दी जा सकती है। अधिकतर नियुक्तियां उन नेताओं या कार्यकर्ताओं को मिलेंगी जो संगठन के पदाधिकारी नहीं हैं। इस मुद्दे पर प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के वक्त ही शीर्ष स्तर पर चर्चा हो चुकी है।
