Most Expensive Coffee: अगर आप कॉफी के शौकीन हैं और अलग-अलग फ्लेवर की कॉफी पीने का शौक रखते हैं, तो आपने “सिवेट कॉफी” (Civet Coffee) या “कोपी लुवाक” (Kopi Luwak) का नाम जरूर सुना होगा। ये कॉफी दुनियाभर में अपनी कीमत और अनोखे प्रोसेस के लिए मशहूर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह कॉफी किसी फैक्ट्री या मशीन से नहीं, बल्कि बिल्ली की पॉटी यानी मल (feces) से तैयार की जाती है।
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यह कोई मजाक नही बल्कि सच है और दुनियाभर में यही कॉफी करोड़ों रुपए की कीमत में बिकती है और इसे पीने वालों की कोई कमी नहीं। आइए जानते हैं आखिर क्या है इस खास कॉफी की कहानी, इसे कैसे बनाया जाता है, इसके फायदे क्या हैं और क्या इससे कोई नुकसान भी हो सकता है?
क्या है सिवेट कॉफी?
सिवेट कॉफी, जिसे इंडोनेशिया में कोपी लुवाक कहा जाता है, दरअसल एक विशेष प्रक्रिया से तैयार की जाती है। इसमें इस्तेमाल होने वाले बीन्स सीधे पेड़ से तोड़कर नहीं लाए जाते, बल्कि एक जानवर – सिवेट कैट (Civet Cat) यानी कस्तूरी बिलाव – की मदद से तैयार किए जाते हैं।
सिवेट एक प्रकार की बिल्ली होती है, जो कॉफी चेरी (coffee cherries) को खाना पसंद करती है। ये बिल्ली कॉफी की सबसे मीठी और पकी हुई चेरी को चुनकर खाती है। लेकिन उसका पाचन तंत्र बीज यानी बीन्स को पूरी तरह नहीं पचा पाता। ऐसे में ये बीन्स उसके मल के साथ बाहर निकल आते हैं।
कैसे बनती है ये कॉफी?
1. संग्रहण – जंगल या कैद में पाले गए सिवेट कैट्स की पॉटी से इन बीन्स को निकाला जाता है।
2. सफाई – इन बीन्स को अच्छे से धोया जाता है ताकि किसी तरह की गंदगी या बैक्टीरिया न रह जाए।
3. फर्मेंटेशन प्रोसेस – माना जाता है कि जब बीन्स सिवेट के पेट से होकर गुजरते हैं, तो उनमें प्राकृतिक फर्मेंटेशन हो जाता है, जिससे उनका स्वाद और पौष्टिकता बढ़ जाती है।
4. रूईस्टिंग (भूनना) – इन बीन्स को रोस्ट करके फिर पाउडर बनाया जाता है और फिर कॉफी बनाई जाती है।

क्या है इसका स्वाद और खासियत?
सिवेट कॉफी का स्वाद सामान्य कॉफी से काफी अलग और अधिक स्मूथ माना जाता है। इसमें कड़वाहट कम और मिठास हल्की होती है। इसके अलावा इसमें low acidity और rich aroma पाया जाता है।
कहा जाता है कि जब कॉफी बीन्स सिवेट कैट के पाचन तंत्र से होकर गुजरते हैं, तो उनमें पाए जाने वाले प्रोटीन टूट जाते हैं और बीन्स में मौजूद फ्लेवर मॉडिफाई हो जाता है, जिससे कॉफी की गुणवत्ता और बढ़ जाती है।
भारत में कहां होती है इसकी खेती?
भारत में सिवेट कॉफी मुख्य रूप से कर्नाटक के कूर्ग जिले और कुछ हद तक केरल और आंध्र प्रदेश के कॉफी बागानों में तैयार की जाती है। हालांकि भारत में इसका उत्पादन सीमित मात्रा में ही होता है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजा जाता है।
कितनी है इसकी कीमत?
अमेरिका और यूरोप में 1 कप सिवेट कॉफी की कीमत 5,000 से 6,000 रुपये तक हो सकती है।
1. 1 किलो सिवेट कॉफी की कीमत 25,000 से 30,000 रुपये या उससे अधिक हो सकती है।
2. भारत में भी ऑनलाइन और गोरमेट स्टोर्स में इसकी बिक्री होती है, लेकिन सीमित मात्रा में।
क्या हैं इसके फायदे?
1. स्मूद फ्लेवर – इसमें कड़वाहट कम होती है और यह स्वाद में अधिक संतुलित होती है।
2. डाइजेस्टिव एंजाइम्स से भरपूर – माना जाता है कि सिवेट के पाचन से गुजरने के कारण इसमें पाचन से जुड़े एंजाइम आ जाते हैं।
3. एनर्जी बूस्टिंग – आम कॉफी की तरह यह भी एनर्जी को बूस्ट करती है।
4. अत्यधिक एंटीऑक्सीडेंट्स – रिसर्च के अनुसार, इस कॉफी में एंटीऑक्सीडेंट्स अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जो कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करते हैं।

क्या हैं इसके नुकसान?
जानवरों के साथ क्रूरता…
इस कॉफी की मांग बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में सिवेट कैट्स को जंगलों से पकड़कर पिंजरे में बंद किया जाने लगा है। उन्हें जबरन कॉफी चेरी खिलाई जाती है और यह उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है।
नैतिक और पर्यावरणीय चिंताएं..
एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट्स इसे अनैतिक मानते हैं। उनका कहना है कि कॉफी के लिए जानवरों को कष्ट देना गलत है।
स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी खतरे…
हालांकि बीन्स को अच्छी तरह प्रोसेस किया जाता है, लेकिन फिर भी मल से तैयार किसी खाद्य उत्पाद के लिए बेहद कड़े स्वच्छता मानक जरूरी होते हैं। इसके अभाव में बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा हो सकता है।
नकली सिवेट कॉफी का बाजार..
बढ़ती मांग और ऊंची कीमत की वजह से आज कई जगह नकली सिवेट कॉफी बेची जाती है, जिससे उपभोक्ता धोखा खा सकते हैं और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।
