Morena जिले के कई गांवों में आज भी किसी शव का अंतिम संस्कार करना सबसे बड़ी चुनौती है। सोमवार को ऐसी ही दुविधा व चुनौती का सामना अंबाह जनपद की बरेह ग्राम पंचायत के हाथीरथी गांव के लोगों ने किया। एक महिला के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए गांव के युवक दो घंटे से अधिक देर तक तिरपाल तानकर खड़े रहे।
खुले आम होता है अंतिम संस्कार
जानकारी के अनुसार हाथीरथी गांव निवासी शिवनारायण सिंह तोमर की पत्नी भूदेवी सिंह तोमर उम्र 45 साल का कैंसर की बीमारी के चलते सोमवार को निधन हो गया था। 6000 से अधिक की आबादी वाले बरेह-हाथीरथी गांव में कोई श्मशान नहीं है। ऐसे में लोग अपने किसी परीजन के शव का अंतिम संस्कार अपने खेतों के पास या फिर गांव के बाहर खाली जमीन पर करते हैं। भूदेवी के शव का अंतिम संस्कार करते समय अचानक से तेज हवा फिर बारिश शुरू हो गई।
काफी समय से की जा रही है श्मशान की मांग
बारिश के कारण चिता की आग बुझने के आसार देख ग्रामीणों ने बड़ी तिरपाल मंगाकर उसे जलती हुई चिता पर तान दिया। कुछ देर बाद ही चिता की लपटाें से तिरपाल जलने का डर लगने लगा, ऐसे में जिस ओर हवा के साथ बारिश आ रही थी, उसी ओर तिरपाल की ओट करके लगभग दो घंटे तक ग्रामीण खड़े रहे। वही ग्रामीणों के द्वारा कई सालों से श्मशान की मांग की जा रही है। पंचायत के सरपंच-सचिव से लेकर जनपद तक के अफसर नहीं सुनते। हर साल बारिश में गांव को यह समस्या झेलनी पड़ती है। हम आपको बता दे कि मुरैना में यह पहला मामला नहीं है।
Morena: गांवों में नहीं है श्मशान
बारिश के सीजन में जिले के कई गांंवों में ऐसे हालात बनते है क्योंकि कई गांवों में श्मशान ही नहीं। मनरेगा योजना से पंचायतों ने श्मशान बनाए, उनमें से कई पर दबंगों ने कब्जा कर उन्हें खेतों में शामिल कर लिया है। कई जगह श्मशान पहुंचने का रास्ता अतिक्रमण की चपेट में हैं।
