morena news: बारिश के सीजन में मुरैना जिले के 70 से ज्यादा गांवों में अंतिम संस्कार करना यातना भरा हो गया है। कहीं श्मशान नहीं होने से सड़क किनारे तो कहीं तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला अंबाह तहसील के अल्मेडा गांव में गुरुवार को सामने आया, इस गांव में शश्मशान तो है लेकिन जहां अर्थी काे श्मशान तक ले जाने के लिए परिजनों व ग्रामीणों को घुटनों तक गहरे पानी व कीचड़ से निकलना पड़ा। इसके वीडियो Social Media पर वायरल हो रहे हैं।
श्मशान पहुंचने का रास्ता नहीं
जानकारी के अनुसार बता दे कि अल्मेडा गांव में 70 वर्षीय जलदेवी पत्नी चरण सिंह तोमर का गुरुवार की सुबह निधन हो गया। परिजन व ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए शव को गांव के बाहर मुक्तिधाम के लिए लेकर निकले। जानकारी के अनुसार इस गांव में श्मशान तो है, लेकिन इस श्मशान तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं हैं।
morena news: घुटनों तक पानी
श्मशान जिस स्थान पर बना है, उसके चारों तरफ खेत हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण खेताें में घुटने तक पानी भरा हुआ है। ऐसे में शव को मुक्तिधाम तक ले जाने के लिए अर्थी व अंतिम संस्कार की सामग्री को कंधों पर रखकर करीब 400 मीटर घुटनों तक गहरे पानी से होकर निकलना पड़ा। वही यह समस्या स्थानीय निवासियों को कई सालों से है, कई बार विधायक, सांसद से लेकर जिला प्रशासन के अफसरों को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन श्मशान की सड़क नहीं बनी।
