कभी बीहड़ों और बागियों के लिए पहचाना जाने वाला चंबल अंचल अब अपनी मिठास से देश-दुनिया में नाम कमा रहा है. मकर संक्रांति नजदीक आती है, मुरैना की गलियां तिल, गुड़ और घी की खुशबू से महक उठती हैं. यही वह समय होता है, जब मुरैना की शाही गजक अपने पूरे शबाब पर होती है. वैसे गजक तो कई जगह बनती है, लेकिन मुरैना की गजक की असली पहचान उसकी तासीर और स्वाद में छिपी है. जो सीधे-सीधे चंबल के पानी और यहां के अनुभवी कारीगरों से जुड़ी मानी जाती है.
संक्रांति आते ही हवा में घुल जाती है गजक की खुशबू
सर्दियों की शुरुआत के साथ ही मुरैना में गजक का मौसम शुरू हो जाता है, लेकिन मकर संक्रांति पर इसका बाजार चरम पर पहुंच जाता है। जिले की हर गली, हर चौराहे पर गजक की दुकानें सज जाती हैं. अनुमान के मुताबिक, मुरैना जिले में करीब 400 से 500 गजक की दुकानें हैं, जो केवल सर्दियों के तीन-चार महीनों में ही करोड़ों रुपये का कारोबार कर लेती हैं.
देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच रही मुरैना की मिठास
मुरैना की गजक अब सिर्फ मध्यप्रदेश या उत्तर भारत तक सीमित नहीं रही. दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, सूरत, अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में इसकी जबरदस्त मांग है। यही नहीं, यहां की गजक इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशों तक भी निर्यात की जा रही है. दुकानदार बताते हैं कि मकर संक्रांति के आसपास बड़ी संख्या में लोग गजक और गुड़ के लड्डू पार्सल कराकर अपने रिश्तेदारों और मित्रों को भेजते हैं, जिससे मुरैना की मिठास दूर-दराज तक पहुंचती है।
सिर्फ मुरैना में मिलती हैं गजक की शाही वैरायटी
चंबल अंचल में पारंपरिक गुड़-तिल की गजक तो वर्षों से मशहूर है, लेकिन समय के साथ यहां स्वाद के नए प्रयोग भी देखने को मिलते हैं। मुरैना में करीब 25 तरह की गजक उपलब्ध है.
फेमस वैरायटी
पारंपरिक गुड़-तिल्ली गजक
काजू गजक और काजू पट्टी
समोसा गजक
ड्राई फ्रूट लड्डू
गजक रोल
मूंगफली वाली गजक
खस्ता गजक
तिलकुट गुड़
ड्राई फ्रूट रोल गजक
मकर संक्रांति पर गजक के साथ-साथ गुड़ के लड्डू की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है।
इम्यूनिटी बूस्टर मानी जाती है गजक
मुरैना में करीब 103 वर्षों से गजक बनाने की परंपरा चली आ रही है। शुद्ध देसी गुड़ और चंबल में उपजे तिल से बनी गजक को सर्दियों में शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है। यही वजह है कि इसे इम्यूनिटी बूस्टर भी कहा जाता है.यहां के कारीगर इतने माहिर हैं कि महज 20 मिनट में गजक तैयार कर देते हैं, लेकिन इसकी असली कसौटी गुड़ की चाशनी की सही पकावट और तिल को भूनने का सही समय होता है।
जाने कैसे बनती है शाही गजक?
गजक कारीगर बताते हैं, शाही गजक सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि हुनर की पहचान है. सबसे पहले शुद्ध देसी गुड़ और साफ तिल लिया जाता है। तिल को धीमी आंच पर ऐसा सेंका जाता है कि खुशबू आए, जले नहीं. उधर गुड़ की चाशनी तैयार होती है, जिसे ठंडा कर लकड़ी के सहारे बार-बार खींचा जाता है, जब तक वह बर्फ जैसी सफेद न हो जाए. यही इसकी असली पहचान है। फिर इसे भुने तिल में मिलाकर कुटाई की जाती है और पत्थर की पाट पर फैलाकर काटा जाता है.
