विपक्ष के हंगामे और स्थगन से रुक गया कामकाज
संसद का मानसून सत्र हमेशा एक महत्वपूर्ण अवसर होता है, जहां सरकार और विपक्ष दोनों अपनी प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हैं, और देश के भविष्य से जुड़े अहम फैसले लिए जाते हैं। लेकिन इस बार मानसून सत्र में जो कुछ हुआ, वह न केवल अविश्वसनीय था, बल्कि यह एक गंभीर सवाल भी खड़ा करता है

क्या यह सत्र जनता की उम्मीदों पर खरा उतर पाया? 21 जुलाई से शुरू हुए इस सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा में कई विधेयक पारित हुए, लेकिन सत्र की उत्पादकता बेहद कम रही। हंगामे, स्थगन और विपक्षी दलों के बायकॉट ने कामकाज की गति को रुकवा दिया। आइए, इस सत्र के हंगामों, अव्यवस्था और अंजाम पर एक नजर डालते हैं।
लोकसभा में सिर्फ 37 घंटे की चर्चा
इस मानसून सत्र के दौरान, लोकसभा में निर्धारित 120 घंटे की चर्चा के लक्ष्य के मुकाबले केवल 37 घंटे ही कार्यवाही हो पाई। संसद के स्पीकर ओम बिरला ने भी इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, “यह सत्र अपेक्षाकृत कम प्रभावी रहा है, और इसका मुख्य कारण सदन में बार-बार उठे व्यवधान रहे हैं।” विपक्ष के लगातार विरोध, विभिन्न मुद्दों पर हो रहे हंगामे और फिर स्थगन की स्थिति ने संसद की कार्यवाही को बुरी तरह प्रभावित किया।
राज्यसभा और विधेयक पास होने का दौर
मानसून सत्र में लोकसभा में 12 और राज्यसभा में 14 विधेयक पारित हुए। लेकिन जिन मुद्दों पर पूरे देश की नजर थी, उन पर कोई गहन चर्चा नहीं हुई। उदाहरण के तौर पर, राज्यसभा में असम के गुवाहाटी में भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) के निर्माण से जुड़े विधेयक पर भी हंगामे के बीच चर्चा की गई। वहीं, लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए गए तीन विधेयकों पर विपक्ष ने जबरदस्त हंगामा किया और कागज की कॉपियां फाड़ कर गृह मंत्री पर फेंक दी। इसके बाद कुछ विधेयक बिना किसी गंभीर चर्चा के पारित किए गए।
विपक्षी दलों का लगातार विरोध और प्रदर्शन
मानसून सत्र में सबसे अधिक चर्चा बिहार के SIR (Special Investigation and Research) मुद्दे पर हुई। विपक्षी दलों ने इसके खिलाफ कई बार विरोध प्रदर्शन किया और इस पर चर्चा की मांग की। इसके अलावा, विपक्ष ने संसद परिसर में वोट चोरी और बिहार SIR के मुद्दे पर प्रदर्शन किया। इस विरोध और हंगामे ने संसद की कार्यवाही को और अधिक जटिल बना दिया। विपक्षी दलों का आरोप था कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा करने से बच रही है।
लोकसभा की कार्यवाही का स्थगन
मानसून सत्र के दौरान कई बार कार्यवाही स्थगित की गई। 20 अगस्त को लोकसभा की कार्यवाही को दो बार स्थगित किया गया, और आखिरकार उसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद थे, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा हंगामा करने के कारण कार्यवाही का कोई मतलब नहीं रह गया।
संसद में सवालों का कम जवाब
लोकसभा में इस सत्र के दौरान कुल 419 सवाल किए गए थे, जिनमें से केवल 55 सवालों के जवाब दिए गए। यह आंकड़ा भी संसद के कार्यकुशलता पर सवाल उठाता है। ओम बिरला ने बताया कि तय समय में केवल 37 घंटे ही चर्चा हो पाई, जो कि 120 घंटे के लक्ष्य से बहुत कम था।

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