संसद का मानसून सत्र में क्या सरकार के खिलाफ आएगा बड़ा प्रस्ताव?
नई दिल्ली, 20 जुलाई 2025: 21 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र में बिहार की मतदाता सूची (Bihar Voter List) पर विपक्ष की राजनीतिक रणनीति का बड़ा असर देखने को मिल सकता है। खासकर INDIA गठबंधन की पार्टियां, जिनमें कांग्रेस, RJD, और तृणमूल कांग्रेस (TMC) शामिल हैं, सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह से एकजुट हो चुकी हैं। कांग्रेस की अगुवाई में यह दल चुनाव आयोग के माध्यम से सरकार को निशाने पर लेने की योजना बना रहे हैं।
विपक्ष की रणनीति: विशेष कार्यस्थगन प्रस्ताव की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, बिहार में विशेष गहन समीक्षा (SIR) के मुद्दे पर विपक्ष संसद में कार्यस्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। यह एक संसदीय प्रक्रिया है, जिसका उपयोग किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर तत्काल चर्चा के लिए किया जाता है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर संसद के दोनों सदनों में सरकार को घेरने का प्रयास करेगा।
INDIA गठबंधन ने यह भी रणनीति बनाई है कि इस प्रस्ताव के माध्यम से वे सरकार को मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपाती भूमिका के मुद्दे पर कठघरे में खड़ा करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई तक कोई बड़ा कदम नहीं
हालांकि, सरकार के लिए राहत की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने बिहार की SIR प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई है। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होनी है, जिससे सरकार को इस मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय होने तक संसद में बचाव की स्थिति मिलेगी।
सरकार इस स्थिति को अपनी बचाव की ढाल के रूप में इस्तेमाल कर सकती है, और सदन में विपक्ष को जवाब देने के लिए समय ले सकती है।
मानसून सत्र: समय से पहले घोषणा और विपक्ष की प्रतिक्रिया
आमतौर पर, संसद के सत्र की तारीख 10 दिन पहले घोषित की जाती है, लेकिन इस बार 47 दिन पहले मानसून सत्र की घोषणा की गई है। यह विपक्ष के लिए चौंकाने वाली बात थी, क्योंकि इसे एक राजनीतिक कदम माना गया है। कांग्रेस के सांसद जयराम रमेश ने इस पर प्रतिक्रिया दी और कहा:
“सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर जैसे मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए यह सत्र जल्दी बुलाया है।”
ऑपरेशन सिंदूर पर भी हो सकती है चर्चा
विपक्ष ऑपरेशन सिंदूर पर भी सरकार को घेरने की योजना बना सकता है, खासकर पहलगाम आतंकी हमले, खुफिया विफलता, और सेना के अभियान में विदेशी हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर। इसके अलावा, महाभियोग प्रस्ताव भी चर्चा में आ सकता है, जिसमें जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठ सकता है।
सरकार के लिए चुनौती: आर्थिक सुधार एजेंडा
वहीं, सरकार की प्राथमिकता है कि इस सत्र के दौरान अपने आर्थिक सुधार एजेंडे को आगे बढ़ाया जाए। सरकार ने डिजिटल प्रतिस्पर्धा विधेयक, जीएटी न्यायाधिकरण विधेयक, और दिवालियापन एवं ऋणशोधन संहिता संशोधन विधेयक जैसे कानूनों पर प्रगति करने की योजना बनाई है।
इसका उद्देश्य आर्थिक सुधार और व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा देना है, लेकिन बिहार के मतदाता सूची विवाद से जुड़ा यह राजनीतिक मुद्दा सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
बिहार और सत्र का असर
संसद का मानसून सत्र इस बार बिहार की राजनीति और विपक्ष की एकजुटता के कारण जटिल स्थिति में आ सकता है। बिहार मतदाता सूची पर विपक्ष का हमला और इसके साथ जुड़ी राजनीतिक रणनीतियां संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर सकती हैं। अगर सरकार इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो संसदीय बहस और राजनीतिक आक्रामकता बढ़ सकती है।
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