Monsoon Pimples Home Remedies: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने स्किन ख्याल रखने का टाइम ही नहीं मिलता हम कॉलेज, ऑफिस घर के कामों में इतने उलझे रहते हैं, जिसके चलते हमें पॉर्लर जाने का टाइम नहीं मिलता है। खासकर मानसून के समय में बढ़ती नमी और तापमानन की वजह से त्वचा अत्याधिक तेल छोड़ती है, जिससे त्वचा के छिद्र बंद हो जाते हैं और पिंपल्स व एक्ने की समसया होती है। बारिश के मौसम में बैक्टीरिया, फंगस और मोल्ड तेजी से पनपते हैं, जिससे संक्रमण की आशंका रहती है।
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क्या ये समस्या सिर्फ स्किन की सफाई से ठीक हो जाएगी? आइए जानते हैं मॉनसून में पिंपल्स से निपटने के कुछ असरदार घरेलू नुस्खे, जीवनशैली सुझाव एवं चिकित्सकीय ध्यान।
नीम के पत्तों की पेस्ट…
नीम में मजबूत एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं, जो हवा में बढ़ते जीवाणुओं से पिंपल्स को रोकते हैं। कुछ नीम के पत्ते पानी से पीसकर पेस्ट बनाएं, चेहरे पर प्रभावित हिस्सों पर 10–15 मिनट लगाकर गुनगुने पानी से धो लें। आप इसमें हल्दी और दूध भी मिला सकते हैं; यह संयोजन तेंदुए या पिंपल निशानों को भी कम करता है। दैनिक उपयोग से त्वचा में सुधार होता है।
एलोवेरा जेल..
एलोवेरा एक शांत, ठंडक देने वाला घरेलू उपाय है जिसमें सैलिसिलिक एसिड और सल्फर दोनों होते हैं। यह सूजन को कम करता है, त्वचा में हाइड्रेशन कायम रखता है और नए पिंपल्स बनने से रोकता है। चेहरे को पहले धोएं, फिर एलोवेरा जेल लगाएं और 20–30 मिनट बाद धो लें। रोज़ाना उपयोग से त्वचा शांत होती है।
मुल्तानी मिट्टी और गुलाबजल से फेस पैक..
मिट्टी का हल्का पाउडर—मुल्तानी मिट्टी (Fuller’s Earth) त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी निकालता है। इसमें गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाकर सूखने दें, फिर धो लें। यह पोर खोलता है, चेहरे को शाइन और ग्लो देता है, और मॉनसून में होने वाले अक्यूपंइंट्स को खत्म करता है।
शहद और दालचीनी का फेस मास्क…
शहद में जीवाणु-विरोधी गुण होते हैं, जबकि दालचीनी में एंटीमिक्रोबियल गुण होते हैं। एक चम्मच शहद में एक चुटकी दालचीनी पाउडर मिलाकर प्रभावित हिस्सों पर लगाएं। 10–15 मिनट बाद धो लें। यह मास्क पिंपल्स कम करता है, सूजन घटाता है और त्वचा को उज्जवल भी बनाता है।

हल्दी पाउडर और दूध का पेस्ट…
हल्दी की शक्तिशाली एंटीसेप्टिक क्षमता और दूध के मलाईदार तत्व एक साथ मिलकर पिंपल्स से उभरती सूजन को घटाते और बैक्टीरिया को मारते हैं। हल्दी (1/2 चम्मच) को दूध या दही के साथ मिलाकर पेस्ट बनाएं और प्रभावित हिस्से पर 15 मिनट लगाएं, फिर धो लें। नियमित उपयोग से त्वचा साफ और नग्न रहती है।
खीरे और चावल के पानी से पैक…
खीरे का रस त्वचा को ठंडक पहुंचाता है और सूजन को कम कर सकता है। चावल का पानी पौषक तत्वों से भरपूर होता है और त्वचा को नरम करने में मदद करता है। 1/4 कप खीरे का रस और 1/4 कप चावल का पानी मिश्रित करके फेस पैक बनाएं, 15 मिनट लगाकर धो लें। यह चेहरे पर ताजगी और राहत देता है।
चाय के पेड़ का तेल (Tea Tree Oil)
चाय के पेड़ का तेल एक शक्तिशाली एंटीसेप्टिक उपाय है जो जीवाणु पिंपल्स का इलाज करता है। इसे नारियल या बादाम तेल से पतला करें और कपास की सहायता से सीधे पिंपल्स पर लगाएं। रात भर छोड़ दें, सुबह हल्के फेसवॉश से धो लें। अत्यधिक नमी वाले मौसम में भी यह सुरक्षित तरीका है।
पर्याप्त पानी पियें व मॉइस्चराइज करें…
हाइड्रेशन त्वचा को लुब्रिकेट रखता है और अतिरिक्त तेल की मात्रा को नियंत्रित करता है। मॉइस्चराइज़र हल्का, जेली या जेल बेस्ड चुनें जो कमोडोजेनिक न हो। चेहरे को दिन में दो बार साफ करें—एक बार सुबह और एक बार रात को—ताकि पोर साफ रहें और पिम्पल्स न फसें।
साफ-सुथरी दिनचर्या व व्यक्तिगत स्वच्छता…
बारिश में बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। अपने तकियों के कवर, बेडशीट, मोबाइल स्क्रीन और फोन इयरफोन को नियमित रूप से साफ रखें। चेहरे को अनावश्यक स्पर्श (Touching) से बचें क्योंकि इससे बैक्टीरिया त्वचा पर फैलते हैं।

मेडिकल सलाह कब लेना जरूरी?
यदि पिंपल्स एक महीने से ज्यादा समय तक बने रहे, दर्द, सूजन या रिकवरी के बावजूद स्कार्स हो रहे हों, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें। गंभीर मामले जैसे सिस्टिक एक्ने या इंफेक्शन में घरेलू तरीके पर्याप्त नहीं होते। विशेषज्ञ निदान अधिक प्रभावी इलाज दे सकते हैं।
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