monsoon 2025 india flood alert : जब बारिश राहत नहीं, आफत बन जाए

monsoon 2025 india flood alert: बारिश का नाम सुनते ही मन में कहीं ना कहीं सुकून की एक लहर दौड़ती है मिट्टी की सोंधी खुशबू, ठंडी हवा और हरियाली का सपना। लेकिन जब यही बारिश हफ्तों तक नहीं थमती, तो वो खुशबू सीलन बन जाती है, और सुकून डर में बदल जाता है।
इस वक्त भारत का बड़ा हिस्सा इसी डर से जूझ रहा है। कहीं नदियां उफान पर हैं, तो कहीं सड़कें दरिया बन चुकी हैं।
मुंबई में रेड अलर्ट: 40kmph की हवाएं, अगले 3 घंटे बेहद नाजुक
मौसम विभाग ने मुंबई में अगले तीन घंटों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। तेज हवाएं (40 किमी प्रति घंटे), भारी बारिश और जलभराव की आशंका ने शहर को एक बार फिर सावधान कर दिया है।
मुंबई में रहने वाले लोगों के लिए ये कोई नई बात नहीं, लेकिन हर बार ये डर और गहराता है
“कहीं फिर से लोकल ट्रेनें न रुक जाएं, ऑफिस न बंद हो जाए, और स्कूलों में छुट्टी न करनी पड़े।”
उन्नाव में सड़कों पर नावें, 80 गांवों में तबाही
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में गंगा नदी ने रौद्र रूप ले लिया है। 80 गांव पानी में डूब चुके हैं। कई जगह लोग नाव से आने-जाने को मजबूर हैं।
100 से ज्यादा परिवार बेघर हो गए हैं तंबुओं में रहना, बच्चों को संभालना, बीमारों की दवा ढूंढ़ना ये सब दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया है।

कहीं पहाड़ खिसक रहे हैं, कहीं सड़कें टूट रहीं
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हिमाचल में अब तक 404 मौतें हो चुकी हैं। भूस्खलन, सड़कें धंसी हुई, और लोग पहाड़ों में फंसे हुए हैं।
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पंजाब में 14,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। खेत डूब गए हैं, फसलें बर्बाद।
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तेलंगाना में तेज बारिश ने सड़कें तोड़ीं, ट्रक गड्ढों में फंसे हुए हैं।
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उत्तराखंड में हाईवे के 100 मीटर हिस्से बह गए।
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बिहार में गंगा का जलस्तर फिर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है।
मानसून की विदाई की दस्तक: राजस्थान से शुरू हुई वापसी
राजस्थान के श्रीगंगानगर, नागौर, जोधपुर और बीकानेर जैसे इलाकों से मानसून ने समय से 3 दिन पहले विदा लेना शुरू कर दिया है।
पंजाब और गुजरात से भी दो-तीन दिन में मानसून लौटने लगेगा। पर मध्य प्रदेश, दक्षिण कर्नाटक, और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में अभी कुछ हफ्ते बारिश बनी रहेगी।

सवाल ये है कि क्या हम तैयार थे?
हम हर साल बाढ़ और भूस्खलन की खबरें पढ़ते हैं, लेकिन क्या हम कभी उन गांवों तक पहुंचे हैं जहां बच्चे अब स्कूल नहीं जा पाते? जहां बर्तन तैरते हैं, रोटियां गीली हो जाती हैं, और रातें डर के साए में बीतती हैं?

बारिश कोई दुश्मन नहीं पर जब इंफ्रास्ट्रक्चर कमज़ोर, योजना अधूरी, और प्रशासन धीमा हो, तो ये हर बूँद भारी लगने लगती है।
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