mohan bhagwat yuva samvad bhopal: भोपाल में शुक्रवार का दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में खास रहा. कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने जब युवाओं से बात की तो संदेश साफ था देश का भविष्य जाग चुका है और अब जिम्मेदारी भी उसी के कंधों पर है ।

RSS शताब्दी वर्ष: युवाओं से सीधा संवाद
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में प्रवास कर रहे सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का यह भोपाल दौरा दो दिवसीय रहा. पहले दिन उन्होंने मध्यभारत प्रांत के 16 शासकीय जिलों से आए युवाओं से संवाद किया डॉ. भागवत ने कहा कि संघ अपने जन्म से ही एक लक्ष्य लेकर चला है,अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा करते हुए भारत को परम वैभव तक पहुंचाना। यह सिर्फ संगठन का नहीं, बल्कि हर स्वयंसेवक का संकल्प है।
“देश समाज से बनता है, सिर्फ नेताओं से नहीं”
अपने संबोधन में सरसंघचालक ने कहा कि कोई भी देश केवल नेताओं, नीतियों या व्यवस्थाओं से महान नहीं बनता
जब समाज गुणसंपन्न होता है, तभी नेता और व्यवस्थाएं काम करती हैं
उन्होंने कहा कि आज भारत का युवा जाग गया है, वह सिर्फ अपने करियर तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि देश को मजबूत और समर्थ बनाना चाहता है. संघ युवाओं से आग्रह करता है कि वे शाखा से जुड़ें या अपनी रुचि के अनुसार संघ के कार्यों में भाग लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें ।
“अहंकार छोड़िए, गुणों को अपनाइए”
डॉ. भागवत ने युवाओं को आत्ममंथन का संदेश देते हुए कहा कि देश के लिए कुछ करना है तो पहले अपने भीतर बदलाव लाना होगा, अहंकार और स्वार्थ छोड़कर गुणों को अपनाना होगा. उन्होंने दावा किया कि संघ की पद्धति व्यक्ति निर्माण की ऐसी प्रक्रिया है जो अच्छी आदतें और अनुशासन विकसित करती है उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका सबसे बड़ा प्रश्न यही था देश में एकता कैसे बने. इसी विचार से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म हुआ ।
भयमुक्त जीवन और राष्ट्र प्रथम की सोच
सरसंघचालक ने कहा कि आज का युवा कई बार असुरक्षा और चिंता के साथ जीता है, जबकि जरूरत है भयमुक्त जीवन की
स्वयं से पहले देश को रखें। अपने विकास के साथ यह देखें कि परिवार और देश आगे बढ़ रहा है या नहीं।
उन्होंने युवाओं से कहा कि जब देश की बात करेंगे, तो सवाल भी आएंगे और उनके जवाब देने के लिए योग्यता भी लानी होगी, इसके लिए खुद को तैयार करना पड़ेगा ।
युवाओं के सवाल, खुलकर दिए जवाब
युवा संवाद कार्यक्रम में युवाओं ने करियर, सुरक्षा, तकनीक और एआई जैसे विषयों पर सवाल पूछे.संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर भूमिका को लेकर डॉ. भागवत ने कहा कि दुनिया शक्ति की सुनती है और संघ समाज को साथ लेकर भारत को सही दिशा दिखाने का काम कर रहा है एआई पर उन्होंने कहा
हमें एआई को कंट्रोल करना है, एआई से कंट्रोल नहीं होना है. तकनीक का उपयोग देशहित में होना चाहिए।
करियर से जुड़े सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा की कोई पूर्ण गारंटी नहीं होती. बेहतर करियर वही है, जिसमें व्यक्ति उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके और डर के बिना आगे बढ़े ।
“संघ उत्सव नहीं, संपर्क का काम कर रहा है”
कार्यक्रम के पहले सत्र में अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख श्री दीपक विस्पुते ने संघ की 100 साल की यात्रा पर प्रकाश डाला, उन्होंने कहा कि संघ को पहचान जरूर मिली, लेकिन उसे समझने की कोशिश बहुत कम लोगों ने की।उन्होंने बताया कि संघ 1925 में नागपुर से शुरू हुआ और डॉ. हेडगेवार ने समाज को संगठित करने का अनोखा मॉडल दिया।
संघ 100 साल पूरे होने पर उत्सव नहीं मना रहा, बल्कि डोर टू डोर, हार्ट टू हार्ट लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है ।
समर्थ युवा ही भारत को विश्वगुरु बनाएंगे सुदेश शांडिल्य महाराज
भोपाल करुणा धाम के प्रमुख श्री सुदेश शांडिल्य जी महाराज ने युवाओं को सामर्थ्य का अर्थ समझाया. उन्होंने कहा कि समर्थ वही है जिसकी नीयत में दोष नहीं होता उन्होंने सूर्य और गंगा के उदाहरण देते हुए कहा कि सामर्थ्य वही है जो सबको समाहित कर सके।
भारत तभी विश्वगुरु बनेगा, जब उसके युवा समर्थ बनेंगे और यह काम संघ कर रहा है
