भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रमुख जन गोष्ठी में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने हिंदू पहचान, समाज की एकता और संघ की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे. उन्होंने साफ कहा कि मत, पंथ, भाषा और जाति भले अलग हों लेकिन हिंदू पहचान हम सभी को जोड़ने वाली कड़ी है ।
Hindu Identity: ‘हम सबकी संस्कृति एक है’
सरसंघचालक ने कहा
हम सबकी पूजा पद्धति अलग हो सकती है, विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारी संस्कृति, धर्म और पूर्वज समान हैं
उन्होंने मंच से यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू पहचान केवल धार्मिक लेबल नहीं, बल्कि स्वभाव, प्रकृति और जीवन दृष्टि है। धर्म को लेकर प्रचलित धारणाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म का अर्थ केवल रिलीजन या पूजा-पद्धति नहीं है, बल्कि वह संयम, कर्तव्य और सद्भाव का मार्ग है, जो समाज को साथ लेकर चलता है ।
Hindu Identity: चार तरह के हिंदू और संकट का कारण
अपने संबोधन में डॉ. भागवत ने हिंदू समाज को चार वर्गों में बांटते हुए कहा
- जो गर्व से कहते हैं कि हम हिंदू हैं
- जो कहते हैं, इसमें गर्व की क्या बात
- जो घर के अंदर स्वीकार करते हैं
- और जो भूल चुके हैं कि वे हिंदू हैं
उन्होंने कहा कि जब-जब समाज अपनी पहचान भूलता है, तब-तब संकट आता है और इसका प्रमाण भारत का इतिहास देता है। इसी कारण हिंदू समाज को जागृत और संगठित करना जरूरी है ।
संघ की तुलना किसी से नहीं की जा सकती
संघ को लेकर चल रहे नैरेटिव पर बोलते हुए सरसंघचालक ने कहा कि संघ को समझने के लिए उसकी तुलना किसी अन्य संगठन से नहीं की जा सकती संघ अनूठा संगठन है। गणवेश और पथ संचलन से इसे पैरा मिलिट्री कहना या सेवा कार्य देखकर इसे केवल समाजसेवी संगठन मान लेना, दोनों ही अधूरी समझ है उन्होंने कहा कि संघ के पक्ष और विपक्ष—दोनों तरफ से कई भ्रांत धारणाएं फैलाई गईं। शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ समाज के सामने अपनी वास्तविक पहचान रखने का प्रयास कर रहा है।
न प्रतिक्रिया में, न प्रतिस्पर्धा में बना संघ
डॉ. भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ किसी के विरोध या प्रतिक्रिया में शुरू नहीं हुआ। संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे और देश के कई महान व्यक्तित्वों बाल गंगाधर तिलक, सावरकर, गांधी, मालवीय और डॉ. अंबेडकर से संवाद किया। उन्होंने बताया कि डॉ. हेडगेवार को यह चिंता थी कि स्वतंत्रता के बाद समाज फिर कमजोर न पड़ जाए।
स्वाधीनता को स्थायी बनाने के लिए समाज में ‘स्व’ का बोध जरूरी है
इसी सोच से संघ की कार्य पद्धति विकसित हुई, जो लगभग 14 वर्षों के प्रयोग के बाद आकार में आई।
‘प्रेशर ग्रुप नहीं, समाज निर्माण’
सरसंघचालक ने कहा कि संघ ने कभी खुद को प्रेशर ग्रुप नहीं माना
संघ का लक्ष्य संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना है, क्योंकि देश का भविष्य समाज तय करता है, केवल नेता या नीति नहीं
उन्होंने बताया कि संघ शाखाओं के माध्यम से ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास करता है, जहां स्वयंसेवक समाज की आवश्यकता के अनुसार कार्य करें. स्वयंसेवकों के कार्य संघ के किसी रिमोट कंट्रोल से नहीं चलते ।
विरोध और उपेक्षा के बावजूद आगे बढ़ा संघ
डॉ. भागवत ने कहा कि संघ ने अपने सौ वर्षों के सफर में सबसे अधिक विरोध और उपेक्षा झेली है
इतने विरोध के बावजूद स्वयंसेवकों ने भारत माता में आस्था रखकर कार्य जारी रखा
उन्होंने कहा कि आज संघ उस स्थान पर है, जहां समाज का बड़ा वर्ग उस पर भरोसा करता है, लेकिन संपूर्ण समाज को संगठित करने का कार्य अभी बाकी है. सरसंघचालक ने यह भी कहा कि समाज में अच्छे कार्य केवल संघ ही नहीं कर रहा। हर मत-पंथ में सज्जन शक्ति मौजूद है। संघ का काम इन शक्तियों को जोड़ने का वातावरण बनाना है, ताकि वे एक-दूसरे की पूरक बन सकें ।
