मोहन भागवत बोले- रिटायरमेंट नहीं, राष्ट्र सेवा मेरी पहचान!
75 साल का सफर, लेकिन थकान नहीं…
11 सितंबर… एक तारीख जो इतिहास की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें दिखाती है। एक ओर 1893 का वो दिन, जब शिकागो में स्वामी विवेकानंद ने दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का संदेश दिया, और दूसरी ओर 2001 की तारीख, जिसने 9/11 के रूप में विश्व को आतंक की सबसे भयावह झलक दिखाई।
लेकिन आज का दिन 2025 में एक और मायने रखता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का 75वां जन्मदिन।
हमारे पास मोहन भागवत जैसा सरसंघचालक है PM मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भागवत जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए एक लंबा और भावनात्मक संदेश लिखा। उन्होंने कहा:
हम स्वयंसेवकों का सौभाग्य है कि हमारे पास मोहन भागवत जी जैसे दूरदर्शी और परिश्रमी सरसंघचालक हैं, जिन्होंने हमेशा राष्ट्र को सर्वोपरि रखा।
प्रधानमंत्री ने भागवत जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं को याद किया प्रचारक जीवन की तपस्या, संगठनात्मक समझदारी, संगीत और साहित्य के प्रति प्रेम, और सबसे खास उनकी मृदुभाषिता और सुनने की गहराई।
मैं रिटायर नहीं हो रहा, और न ही किसी से कहा भागवत
कुछ दिनों पहले भागवत जी ने एक कार्यक्रम में साफ कहा था
मैंने यह नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा या किसी और को रिटायर हो जाना चाहिए। संघ जब तक चाहेगा, मैं काम करता रहूंगा 80 की उम्र में भी शाखा लगाऊंगा।
ये बात सुनकर हर वो व्यक्ति जो उम्र के किसी पड़ाव पर खुद को धीमा पड़ता महसूस करता है, प्रेरित हो सकता है। 75 की उम्र में जब लोग आराम की ओर बढ़ते हैं, मोहन भागवत राष्ट्र निर्माण के काम में खुद को झोंकने की बात करते हैं।
एक साधारण व्यक्ति, असाधारण विचारधारा
भागवत जी को जानने वाले बताते हैं कि वो सिर्फ एक संगठन प्रमुख नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रेरणा हैं। वो न केवल बड़े विचार रखते हैं, बल्कि उसे जमीन से जोड़कर अमल में भी लाते हैं। विविध संस्कृतियों का सम्मान, युवाओं से संवाद, और आत्मीयता से भरे उनके शब्द आज भी हजारों लोगों के जीवन को दिशा दे रहे हैं।
संघ का शताब्दी वर्ष और भागवत जी की 75वीं वर्षगांठ एक ऐतिहासिक संगम
यह एक सांकेतिक संयोग है कि जिस वर्ष RSS अपना 100वां वर्ष मना रहा है, उसी वर्ष भागवत जी 75 के हुए हैं। यह न सिर्फ एक व्यक्तिगत मील का पत्थर है, बल्कि संघ और राष्ट्रवादी विचारधारा की यात्रा का प्रतीक भी।
थके नहीं हैं, रुके नहीं हैं… यह मोहन भागवत हैं
मोहन भागवत उन व्यक्तित्वों में से हैं जो लोगों को बोलकर नहीं, करके सिखाते हैं। उनके 75 साल का जीवन इस बात का प्रमाण है कि जब तक दिल में देश हो, तब तक उम्र केवल एक संख्या है। जहां एक ओर राजनीति में रिटायरमेंट को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं, वहीं भागवत जी का कहना है हम तो तब तक काम करेंगे, जब तक शरीर और मन साथ देगा।
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