Mohammad Zakir Hussain Death: विश्व प्रसिद्ध तबला वादक और पद्म विभूषण से सम्मानित उस्ताद जाकिर हुसैन का 15 दिसंबर को सैन फ्रांसिस्को में निधन हो गया।लंबे समय से बीमार थे और इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। 9 मार्च 1951 को मुंबई में जन्मे जाकिर हुसैन ने संगीत की दुनिया में अद्वितीय योगदान दिया।

उपलब्धियां और सम्मान
Mohammad Zakir Hussain Death: उस्ताद जाकिर हुसैन को 1988 में पद्म श्री, 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। तीन ग्रैमी पुरस्कार जीतने वाले जाकिर हुसैन भारत के सांस्कृतिक दूत के रूप में भी पहचाने जाते थे।
Mohammad Zakir Hussain Death: उनके पिता उस्ताद अल्लाह रक्खा कुरैशी भी तबला वादक थे और मां का नाम बीवी बेगम था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के सेंट माइकल स्कूल में हुई जबकि ग्रेजुएशन सेंट जेवियर्स कॉलेज से किया।
बचपन से ही संगीत का था जुनून

Mohammad Zakir Hussain Death: उस्ताद जाकिर हुसैन ने मात्र 11 साल की उम्र में अमेरिका में पहला कॉन्सर्ट किया। 1973 में उन्होंने अपना पहला एल्बम “लिविंग इन द मैटेरियल वर्ल्” लॉन्च किया। बचपन से ही वे सपाट सतहों और बर्तनों पर धुन बजाने में माहिर थे।
संघर्ष और सफलता
Mohammad Zakir Hussain Death: अपने शुरुआती दिनों में वे ट्रेन के जनरल कोच में सफर करते और फर्श पर सो जाते थे। तबला उनकी गोद में होता ताकि उसे नुकसान न पहुंचे। 12 साल की उम्र में उन्होंने पंडित रविशंकर और अन्य दिग्गजों के साथ स्टेज पर प्रस्तुति दी जिसके लिए उन्हें 5 रुपए का पुरस्कार मिला। उन्होंने इसे अपनी जिंदगी की सबसे कीमती कमाई बताया था।
वैश्विक पहचान
Mohammad Zakir Hussain Death: उस्ताद जाकिर हुसैन का सम्मान अमेरिका जैसे देशों ने भी किया। 2016 में उन्हें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस में आयोजित “ऑल स्टार ग्लोबल कॉन्सर्ट” में आमंत्रित किया था।
अभिनय में भी बनाई पहचान

Mohammad Zakir Hussain Death: जाकिर हुसैन ने ब्रिटिश फिल्म “हीट एंड डस्ट” और भारतीय फिल्म “साज” में अभिनय किया। हालांकि उनके पिता चाहते थे कि वे संगीत पर ध्यान केंद्रित करें इसलिए उन्होंने अन्य फिल्मों में काम नहीं किया।
संगीत जगत में अपूरणीय क्षति
Mohammad Zakir Hussain Death: उस्ताद जाकिर हुसैन के निधन से संगीत जगत को बड़ी क्षति हुई है। उनके योगदान और विरासत को सदैव याद किया जाएगा।
